यूक्रेनी सैनिकों को यौन यातनाएं दे रहा रूस; कोड वर्ड 'कॉल टू पुतिन' सबसे अधिक खतरनाक, रोंगटे खड़े कर देगा Video

Edited By Updated: 27 Jul, 2026 12:00 PM

how russia uses carnal violence to wage war

द वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट में संयुक्त राष्ट्र और पूर्व युद्धबंदियों की गवाहियों के आधार पर दावा किया गया है कि रूस ने यूक्रेनी कैदियों के खिलाफ व्यवस्थित रूप से यौन हिंसा और यातना का इस्तेमाल किया। रिपोर्ट में सैकड़ों मामलों का उल्लेख है, जबकि...

International Desk: रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर एक नई खोजी रिपोर्ट ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अमेरिकी अखबार द वॉल स्ट्रीट जर्नल (WSJ) ने संयुक्त राष्ट्र (UN) के जांचकर्ताओं, यूक्रेनी वकीलों और रूसी कैद से रिहा हुए पूर्व युद्धबंदियों की गवाहियों के आधार पर दावा किया है कि रूस ने 2022 में युद्ध शुरू होने के बाद से कैदियों को मानसिक और शारीरिक रूप से तोड़ने के लिए यौन हिंसा और यातना को एक सुनियोजित रणनीति के रूप में इस्तेमाल किया। रिपोर्ट के अनुसार, कई पूर्व कैदियों ने आरोप लगाया कि उन्हें हिरासत के दौरान गंभीर शारीरिक प्रताड़ना, यौन हिंसा, बिजली के झटके और लगातार मानसिक उत्पीड़न का सामना करना पड़ा। रूस ने इन दावों पर सार्वजनिक रूप से कोई टिप्पणी नहीं की है।

 

🚨⚠️ Disturbing content. A convicted Russian criminal joined Putin’s war against Ukraine to earn a pardon. After returning home, he was hired by the police and allegedly raped his former partner’s son. Russia gave a criminal a uniform and power. pic.twitter.com/03gc89iOQ1

— Nikanor Volkonsky (@NikanorTerentov) July 25, 2026

रिपोर्ट में यूक्रेनी सैनिक सेर्ही बॉयचुक का हवाला दिया गया है, जिन्हें कथित तौर पर दो वर्षों से अधिक समय तक रूसी हिरासत में रखा गया। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें गंभीर यातनाएं दी गईं और उनका उद्देश्य केवल शारीरिक नुकसान पहुंचाना नहीं, बल्कि मानसिक रूप से पूरी तरह तोड़ देना था। संयुक्त राष्ट्र की जांच के अनुसार, युद्ध के दौरान यौन हिंसा के 310 मामलों का दस्तावेजीकरण किया गया है। इनमें 280 पुरुष, 26 महिलाएं और 4 बच्चियां शामिल हैं। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि कुछ हिरासत केंद्रों में बिजली के झटके, जननांगों को नुकसान पहुंचाने और अन्य गंभीर यातनाओं जैसी घटनाएं सामने आई हैं।

 

रिपोर्ट में कुछ पूर्व कैदियों ने दावा किया कि जेलों में बिजली के झटके देने की एक यातना पद्धति को कथित तौर पर "कॉल टू पुतिन" कहा जाता था। रिपोर्ट के अनुसार, केवल सैनिक ही नहीं बल्कि आम नागरिकों ने भी हिरासत में दुर्व्यवहार के आरोप लगाए हैं। कुछ लोगों ने दावा किया कि उन्हें यूक्रेन समर्थक होने के संदेह में गिरफ्तार कर प्रताड़ित किया गया। युद्ध अपराध मामलों के पूर्व अंतरराष्ट्रीय अभियोजक डेविड श्वेंडिमैन ने रिपोर्ट में कहा कि यदि अलग-अलग स्थानों पर एक जैसी यातना पद्धतियां अपनाई गईं, तो इसकी व्यापक और व्यवस्थित जांच की आवश्यकता है। द वॉल स्ट्रीट जर्नल के अनुसार, इन आरोपों पर क्रेमलिन और रूसी जेल प्रशासन ने कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है।
  

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