Edited By Prachi Sharma,Updated: 25 Oct, 2026 04:48 PM

SIAL Paris 2026 : SIAL Paris 2026 में भारत ने टिकाऊ कृषि, महिला सशक्तिकरण और यूरोप के साथ व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने पर जोर दिया। 17 से 21 अक्टूबर तक पेरिस नॉर्ड विलेपिंटे में आयोजित इस अंतरराष्ट्रीय खाद्य प्रदर्शनी में भारत ने पार्टनर कंट्री...
SIAL Paris 2026 : SIAL Paris 2026 में भारत ने टिकाऊ कृषि, महिला सशक्तिकरण और यूरोप के साथ व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने पर जोर दिया। 17 से 21 अक्टूबर तक पेरिस नॉर्ड विलेपिंटे में आयोजित इस अंतरराष्ट्रीय खाद्य प्रदर्शनी में भारत ने पार्टनर कंट्री के रूप में हिस्सा लिया। इंडिया ट्रेड प्रमोशन ऑर्गनाइजेशन (ITPO) के अध्यक्ष जावेद अशरफ ने भारत की कृषि क्षमता और खाद्य निर्यात की संभावनाओं को दुनिया के सामने रखा। भारत के पवेलियन की थीम ‘फीडिंग आवर टुमॉरो’ थी, जिसमें 140 से अधिक भारतीय निर्यातकों ने भाग लिया।
अशरफ ने कहा कि छोटे किसानों के नेतृत्व में भारत की कृषि क्रांति विविधता, टिकाऊपन, लचीलेपन और आत्मनिर्भरता पर आधारित है। खेती में ड्रोन, सेंसर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) जैसी तकनीकों का इस्तेमाल बढ़ रहा है, जिससे पानी, उर्वरकों और फसलों का बेहतर प्रबंधन संभव हो रहा है। रसायनों का कम उपयोग, जलवायु-अनुकूल खेती और उत्पादों की ट्रेसेबिलिटी भी इस बदलाव के अहम हिस्से हैं। भारत दुनिया की लगभग एक-छठी आबादी के लिए अनाज, फल, सब्जियां, डेयरी उत्पाद, मांस और समुद्री भोजन का उत्पादन करता है।
महिला किसानों की बढ़ती भूमिका
संयुक्त राष्ट्र द्वारा 2026 को महिला किसानों का अंतरराष्ट्रीय वर्ष घोषित किए जाने के बीच, प्रदर्शनी में कृषि क्षेत्र में महिलाओं की भूमिका भी प्रमुखता से सामने आई। महाराष्ट्र के नासिक की प्रमाणित कृषि ड्रोन पायलट प्रियंका ऋषिकेश मोहिते ने अपनी सफलता की कहानी साझा की। नमो ड्रोन दीदी योजना के तहत प्रशिक्षण लेने के बाद वह अगस्त 2024 से ड्रोन के जरिए खेती में मदद कर रही हैं। उनके अनुसार, ड्रोन से एक एकड़ में छिड़काव का काम, जिसमें पहले पूरा दिन और करीब 200 लीटर पानी लगता था, अब सात से आठ मिनट में लगभग 10 लीटर पानी से हो सकता है। इस काम ने उन्हें आर्थिक अवसरों के साथ समाज में एक अलग पहचान भी दी है।
भारत-यूरोप व्यापार समझौते से नई उम्मीदें
अशरफ ने भारत और यूरोप के बीच व्यापारिक सहयोग की संभावनाओं पर भी प्रकाश डाला। उनके अनुसार, प्रस्तावित भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौता (FTA) भारतीय किसानों और छोटे तथा मध्यम उद्यमों (MSME) के लिए यूरोपीय बाजारों तक पहुंच बढ़ाने का अवसर बन सकता है। लेख में बताया गया है कि समझौता जनवरी 2026 में संपन्न हुआ था और साल के अंत तक इस पर हस्ताक्षर होने की उम्मीद थी। इसके लाभ के लिए भारतीय निर्यातकों को यूरोपीय मानकों, गुणवत्ता और बाजार की जरूरतों पर ध्यान देना होगा।
अशरफ के मुताबिक, भारत और यूरोप के बीच व्यापार एक दशक में लगभग दोगुना हुआ है, जबकि भारत में यूरोपीय निवेश चार वर्षों में 80 अरब से बढ़कर 140 अरब हो गया। फ्रांस के साथ 2025-26 में द्विपक्षीय वस्तु व्यापार लगभग 13.6 अरब यूरो रहा। उन्होंने कहा कि भारत को केवल खाद्य उत्पादों की मात्रा बढ़ाने के बजाय यूरोप में अपने ब्रांड की पहचान मजबूत करनी चाहिए।
प्रदर्शनी में पैकेज्ड, रेडी-टू-ईट और प्रीमियम खाद्य उत्पादों के साथ नागा मिर्च और मिथिला मखाना जैसे क्षेत्र-विशेष उत्पादों को भी प्रदर्शित किया गया। अब भारत के सामने चुनौती टिकाऊ कृषि और आधुनिक तकनीक के लाभों को अधिक किसानों तक पहुंचाने तथा वैश्विक बाजारों में भारतीय खाद्य उत्पादों की मौजूदगी मजबूत करने की है।