Edited By Tanuja,Updated: 23 Mar, 2026 05:16 PM

ईरान में 24 दिन से इंटरनेट ब्लैकआउट जारी है, जिसे दुनिया के सबसे गंभीर डिजिटल प्रतिबंधों में माना जा रहा है। अमेरिका-इज़राइल युद्ध के बीच ईरान ने अंतरराष्ट्रीय अदालत में शिकायत की है और हमलों में नागरिक ढांचे को भारी नुकसान का दावा किया है।
International Desk: ईरान इस समय एक गंभीर हालात से गुजर रहा है, जहां पूरे देश में इंटरनेट लगभग पूरी तरह बंद कर दिया गया है। अंतरराष्ट्रीय संस्था NetBlocks के अनुसार यह ब्लैकआउट 24 दिन से ज्यादा समय से जारी है और इसे दुनिया के सबसे कड़े इंटरनेट प्रतिबंधों में गिना जा रहा है। आम लोगों के लिए अंतर्राष्ट्रीय इंटरनेट बंद है, जबकि कुछ सरकारी संस्थानों को ही सीमित एक्सेस दिया गया है। यह स्थिति ऐसे समय में आई है जब अमेरिका और इज़राइल के साथ ईरान का युद्ध जारी है। विशेषज्ञ मानते हैं कि सरकार इंटरनेट बंद करके जानकारी के प्रवाह को नियंत्रित करना चाहती है, ताकि युद्ध से जुड़ी खबरें और अंदरूनी हालात बाहर न जा सकें। साथ ही यह साइबर हमलों से बचाव का भी एक तरीका हो सकता है।
इस बीच ईरान ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ा कदम उठाया है। ईरानी रेड क्रिसेंट सोसायटी ने इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट समेत कई संस्थाओं को 16 शिकायतें भेजी हैं। इन शिकायतों में अमेरिका और इजराइल पर आरोप लगाया गया है कि उन्होंने नागरिक ठिकानों और मेडिकल सुविधाओं को निशाना बनाया है। ईरान के अनुसार हमलों में भारी नुकसान हुआ है। हजारों घर, दुकानें, स्कूल और अस्पताल प्रभावित हुए हैं। राजधानी तेहरान में ही बड़ी संख्या में इमारतें और स्वास्थ्य केंद्र क्षतिग्रस्त होने का दावा किया गया है। ईरान का कहना है कि यह अंतरराष्ट्रीय कानून और जिनेवा कन्वेंशन का उल्लंघन है।
दूसरी तरफ, ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए इजराइल और क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं। इससे साफ है कि जंग अब दोनों तरफ से तेज हो चुकी है और लगातार फैल रही है। अब यह संघर्ष केवल जमीन या आसमान तक सीमित नहीं है, बल्कि डिजिटल दुनिया में भी लड़ा जा रहा है। इंटरनेट ब्लैकआउट, साइबर नियंत्रण और सूचना पर रोक ये सभी मिलकर इसे एक “हाइब्रिड वॉर” बना रहे हैं।