Edited By Tanuja,Updated: 15 Jun, 2026 02:48 PM

अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित शांति समझौते पर इजरायल ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। इजरायल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-ग्विर ने कहा कि यह समझौता इजरायल पर लागू नहीं होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि देश अपनी सुरक्षा नीतियां स्वयं तय करेगा और...
International Desk: अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित शांति समझौते को लेकर इजरायल में असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। इजरायल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-ग्विर( Itamar Ben-Gvir) ने इस समझौते पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) की मध्यस्थता में तैयार हुई कोई भी डील इजरायल पर बाध्यकारी नहीं होगी। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि इजरायल एक स्वतंत्र और संप्रभु राष्ट्र है तथा अपनी सुरक्षा से जुड़े फैसले स्वयं करेगा।
'इजरायल कोई बनाना रिपब्लिक नहीं'
सोशल मीडिया मंच एक्स पर जारी अपने बयान में बेन-ग्विर ने कहा कि इजरायल अमेरिका का सम्मान करता है और राष्ट्रपति ट्रंप का आभारी है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि वह अपनी सुरक्षा नीतियों को किसी बाहरी समझौते के हवाले कर देगा। उन्होंने लिखा, "हम अमेरिका से प्यार करते हैं, लेकिन इजरायल कोई बनाना रिपब्लिक नहीं है। हम अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए स्वतंत्र हैं।" बेन-ग्विर ने स्पष्ट किया कि इजरायल को ईरान समर्थित संगठन Hezbollah और अन्य सशस्त्र समूहों के खिलाफ कार्रवाई करने की पूरी स्वतंत्रता होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि कोई भी ऐसा समझौता स्वीकार नहीं किया जा सकता जो इजरायली सेना के हाथ बांध दे या राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डाले।
लेबनान मोर्चे पर भी सख्त रुख
इजरायली मंत्री ने अपने तर्क के समर्थन में अतीत के कई समझौतों का हवाला दिया। उन्होंने दावा किया कि जब भी इजरायल ने अंतरराष्ट्रीय दबाव के आगे झुककर समझौते किए, तब उसे सुरक्षा के मोर्चे पर भारी कीमत चुकानी पड़ी। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मामलों में विदेशी दबाव के आगे झुकना भविष्य में और बड़े खतरे पैदा कर सकता है। बेन-ग्विर ने कहा कि इजरायल को लेबनान में हिजबुल्लाह की सैन्य क्षमताओं को खत्म करने से कम किसी भी विकल्प पर सहमत नहीं होना चाहिए। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि उत्तरी इजरायल पर होने वाले किसी भी हमले का जवाब लेबनान में कड़ी सैन्य कार्रवाई से दिया जाएगा।
19 जून को हो सकते हैं औपचारिक हस्ताक्षर
उधर अमेरिका और ईरान के बीच समझौते की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। रिपोर्टों के अनुसार, प्रस्तावित समझौते पर 19 जून को Switzerland में औपचारिक हस्ताक्षर किए जा सकते हैं। ईरान के उप विदेश मंत्री Kazem Gharibabadi ने भी संकेत दिया है कि अंतिम दस्तावेज पर हस्ताक्षर होने तक समझौते को लागू नहीं किया जाएगा। विश्लेषकों का मानना है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच समझौता आगे बढ़ता है और इजरायल इसके कुछ पहलुओं का विरोध जारी रखता है, तो पश्चिम एशिया की राजनीति में नई कूटनीतिक खींचतान देखने को मिल सकती है। फिलहाल दुनिया की नजर 19 जून को प्रस्तावित हस्ताक्षर प्रक्रिया और उसके बाद होने वाली वार्ताओं पर टिकी हुई है।