Edited By Radhika,Updated: 31 Mar, 2026 06:16 PM

ईरान युद्ध पर अमेरिका को यूरोपीय देशों का बड़ा झटका लगा है। NATO के प्रमुख सदस्य इटली और स्पेन ने American warplanes को अपने हवाई क्षेत्र और सैन्य ठिकानों के इस्तेमाल की अनुमति देने से इनकार कर दिया है।
इंटरनेशनल डेस्क: ईरान युद्ध पर अमेरिका को यूरोपीय देशों का बड़ा झटका लगा है। NATO के प्रमुख सदस्य इटली और स्पेन ने American warplanes को अपने हवाई क्षेत्र और सैन्य ठिकानों के इस्तेमाल की अनुमति देने से इनकार कर दिया है।
इटली का 'सिगोनेला एयरबेस' इस्तेमाल करने से इनकार
इटली की जॉर्जिया मेलोनी सरकार ने सिसिली स्थित सिगोनेला एयरबेस पर अमेरिकी सैन्य विमानों को उतरने की इजाजत नहीं दी है। इतालवी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी बॉम्बर्स इस बेस का उपयोग मिडिल ईस्ट की उड़ानों के लिए करना चाहते थे। इटली सरकार का कहना है कि अमेरिका ने इस संबंध में कोई औपचारिक अनुरोध नहीं किया और न ही इतालवी सैन्य नेतृत्व से सलाह की, जो कि द्विपक्षीय संधियों के तहत अनिवार्य है। प्रधानमंत्री मेलोनी ने साफ किया है कि भविष्य में ऐसे किसी भी अनुरोध पर संसद की मंजूरी लेना आवश्यक होगा। विपक्षी दलों ने भी सरकार पर दबाव बनाया है कि इटली को इस युद्ध से दूर रखा जाए।
स्पेन ने बंद किया अपना आसमान
इससे पहले स्पेन की रक्षा मंत्री मार्गरीटा रोबल्स ने कड़ा रुख अपनाते हुए ऐलान किया है कि स्पेन का हवाई क्षेत्र उन अमेरिकी विमानों के लिए बंद रहेगा जो ईरान पर हमलों में शामिल हैं। स्पेन ने साफ कर दिया है कि वह न तो अपने सैन्य ठिकानों के इस्तेमाल की इजाजत देगा और न ही अपने आसमान से युद्धक विमानों को गुजरने देगा।
स्विट्जरलैंड ने लगाई हथियारों के निर्यात पर रोक
यूरोप के तटस्थ देश स्विट्जरलैंड ने भी अमेरिका को बड़ा झटका दिया है। स्विस सरकार ने ऐलान किया है कि वह वर्तमान संघर्ष को देखते हुए अमेरिकी कंपनियों को युद्ध सामग्री और हथियारों के निर्यात का लाइसेंस जारी नहीं करेगी। स्विट्जरलैंड ने अपनी 'तटस्थता' की नीति का हवाला देते हुए कहा कि वह किसी भी अंतरराष्ट्रीय सशस्त्र संघर्ष को बढ़ावा नहीं दे सकता।
यूरोप में बढ़ता विरोध
यूरोपीय देशों का यह रुख दिखाता है कि ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य कार्रवाई को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आम सहमति नहीं है। नाटो सहयोगियों का यह असहयोग आने वाले दिनों में अमेरिका की युद्धक रणनीति के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।