यहां 90 लाख घर खाली! फ्री में मिल रहा रहने का मौका, जानें फिर भी लोग घर लेने से क्यों कतरा रहे?

Edited By Updated: 30 Mar, 2026 12:53 PM

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दुनिया के कई देशों में जहां एक अदद छत के लिए लोग जीवनभर की कमाई लगा देते हैं वहीं जापान जैसा विकसित देश एक अनोखी मुसीबत से जूझ रहा है। तकनीक और अनुशासन के लिए मशहूर जापान में इस समय करीब 90 लाख घर (Akiya) खाली पड़े हैं। सरकार इन घरों को बसाने के लिए...

Japan Empty Houses Crisis : दुनिया के कई देशों में जहां एक अदद छत के लिए लोग जीवनभर की कमाई लगा देते हैं वहीं जापान जैसा विकसित देश एक अनोखी मुसीबत से जूझ रहा है। तकनीक और अनुशासन के लिए मशहूर जापान में इस समय करीब 90 लाख घर (Akiya) खाली पड़े हैं। सरकार इन घरों को बसाने के लिए मुफ्त ऑफर और आर्थिक मदद दे रही है लेकिन इसके बावजूद गलियां वीरान हैं।

क्या हैं ये अकिया और क्यों हैं बदनाम?

जापानी भाषा में खाली और लावारिस छोड़े गए घरों को अकिया कहा जाता है। हालांकि सोशल मीडिया पर इन्हें 'भुतहा घर' कहकर प्रचारित किया जाता है, लेकिन असल में इनका किसी अंधविश्वास से लेना-देना नहीं है। ये वे घर हैं जिनका या तो कोई वारिस नहीं बचा या फिर मालिक इन्हें छोड़कर शहरों में बस गए हैं। जापान में कुल 6.1 करोड़ मकान हैं जबकि रहने वाले सिर्फ 5.2 करोड़ लोग। यानी लगभग 90 लाख घरों में कोई चिराग जलाने वाला भी नहीं है।

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क्यों घर छोड़कर भाग रहे हैं लोग?

जापान के इन आलीशान आशियानों के खंडहर बनने के पीछे तीन मुख्य कारण हैं:

बूढ़ा होता देश: जापान की जनसंख्या तेजी से गिर रही है। लोग शादी और बच्चे पैदा करने में दिलचस्पी नहीं ले रहे हैं। अनुमान है कि 2065 तक यहां की आबादी 12.7 करोड़ से घटकर सिर्फ 8.8 करोड़ रह जाएगी।

पलायन का दर्द: बेहतर नौकरियों और चकाचौंध के लिए युवा पीढ़ी गांवों को छोड़कर टोक्यो जैसे महानगरों में शिफ्ट हो गई है जिससे ग्रामीण इलाकों के घर लावारिस हो गए हैं।

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टैक्स का अजीब गणित: जापान में खाली जमीन पर टैक्स ज्यादा लगता है और जिस जमीन पर इमारत खड़ी हो वहां टैक्स कम है। इसलिए लोग पुराने घर गिराते नहीं हैं क्योंकि घर गिरते ही उन्हें भारी टैक्स भरना पड़ेगा।

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सरकार का अकिया बैंक और लुभावने ऑफर

इन वीरान इलाकों को दोबारा जिंदा करने के लिए जापान सरकार ने 'अकिया बैंक' नाम का प्रोजेक्ट शुरू किया है। कई इलाकों में घर पूरी तरह मुफ्त दिए जा रहे हैं। ओकुतामा जैसे सुंदर इलाकों में 100 वर्गमीटर का घर महज 6 लाख रुपये (भारतीय मुद्रा) में मिल सकता है। सरकार घर खरीदने वालों को रिनोवेशन (मरम्मत) के लिए मोटी सब्सिडी और आर्थिक सहायता भी दे रही है।

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फिर भी क्यों आ रहा है इनकार?

मुफ्त घर मिलने के बावजूद लोग इसलिए पीछे हट रहे हैं क्योंकि इन पुराने घरों की मरम्मत का खर्च बहुत ज्यादा है। साथ ही ग्रामीण इलाकों में सुविधाओं की कमी और अकेलेपन के डर से लोग वहां बसने का जोखिम नहीं उठाना चाहते।

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