Edited By Tanuja,Updated: 01 Feb, 2026 03:59 PM

ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने देशभर में चल रहे विरोध प्रदर्शनों को “तख्तापलट जैसी साजिश” करार दिया है। इन प्रदर्शनों के बाद हजारों लोगों की गिरफ्तारी और सामूहिक फांसी की आशंकाओं ने मानवाधिकार संकट गहरा दिया है।
International Desk: ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने देशभर में फैल रहे विरोध प्रदर्शनों को “तख्तापलट जैसी साजिश” बताते हुए इन्हें इस्लामी गणराज्य की व्यवस्था को अस्थिर करने की कोशिश करार दिया है। 86 वर्षीय खामेनेई का यह बयान ऐसे समय आया है, जब ईरान कई दशकों के सबसे गंभीर आंतरिक संकटों में से एक का सामना कर रहा है। खामेनेई ने कहा कि हालिया प्रदर्शन सामान्य जनआक्रोश नहीं, बल्कि संगठित प्रयास हैं, जिनका उद्देश्य धार्मिक शासन व्यवस्था को कमजोर करना है। उन्होंने इशारों-इशारों में विदेशी ताकतों पर भी आरोप लगाया, हालांकि किसी देश का नाम नहीं लिया।
प्रदर्शनकारियों को फांसी की आशंका
मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, विरोध प्रदर्शनों के बाद हजारों लोगों को हिरासत में लिया गया है। ईरान में राजद्रोह और “ईश्वर के खिलाफ युद्ध” (मोहारबा) जैसे आरोपों में मौत की सजा का प्रावधान है। इसी वजह से आशंका जताई जा रही है कि बड़ी संख्या में गिरफ्तार लोगों को कठोर सजाएं दी जा सकती हैं, यहां तक कि सामूहिक फांसी की घटनाएं भी हो सकती हैं।
क्यों भड़के प्रदर्शन
हाल के महीनों में ईरान में आर्थिक संकट, महंगाई, बेरोजगारी, महिलाओं के अधिकारों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर असंतोष गहराता गया है। खासकर युवाओं और महिलाओं की भागीदारी वाले प्रदर्शनों ने सरकार के लिए बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। ईरानी नेतृत्व इन प्रदर्शनों को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा मान रहा है। खामेनेई के बयान को सुरक्षा बलों और न्यायिक संस्थाओं को और सख्त कार्रवाई का स्पष्ट संकेत माना जा रहा है। इससे पहले भी ईरान में विरोध आंदोलनों को दबाने के लिए इंटरनेट बंदी, कड़े कानून और बल प्रयोग किया जाता रहा है।
अंतर्राष्ट्रीय प्रतिक्रिया
संयुक्त राष्ट्र, यूरोपीय संघ और कई मानवाधिकार संगठनों ने ईरान से संयम बरतने, मनमानी गिरफ्तारियां रोकने और निष्पक्ष न्याय प्रक्रिया सुनिश्चित करने की अपील की है। आलोचकों का कहना है कि असहमति को “तख्तापलट” करार देना नागरिक अधिकारों को कुचलने का तरीका बनता जा रहा है। ईरान में मौजूदा हालात यह सवाल खड़ा कर रहे हैं कि क्या देश में शांतिपूर्ण विरोध की कोई गुंजाइश बची है, या फिर हर विरोध को सत्ता के खिलाफ साजिश मानकर कुचला जाएगा।