Edited By Tanuja,Updated: 24 Jan, 2026 02:50 PM

अमेरिकी दबाव और धमकियों के बीच ईरान ने साफ किया है कि वह परमाणु बम नहीं चाहता। सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई के प्रतिनिधि डॉ. अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने कहा कि परमाणु हथियार इस्लाम में हराम हैं और ईरान केवल शांतिपूर्ण परमाणु ऊर्जा के पक्ष में है।
Washington: अमेरिकी राष्ट्रपति की लगातार धमकियों और अंतरराष्ट्रीय दबाव के बीच ईरान ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि उसका परमाणु बम बनाने का कोई इरादा नहीं है। भारत में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के प्रतिनिधि डॉ. अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने कहा कि परमाणु हथियार इस्लाम में ‘हराम’ हैं। एक इंटरव्यू में डॉ. इलाही ने कहा कि ईरान न्यूक्लियर एनर्जी का इस्तेमाल केवल शांतिपूर्ण और मानवीय जरूरतों जैसे इलाज, ऊर्जा और सामाजिक विकास के लिए करना चाहता है। उन्होंने साफ किया कि ईरान कभी भी परमाणु हथियार बनाने के रास्ते पर नहीं गया।
परमाणु बम पर खामेनेई का फतवा
डॉ. इलाही का बयान सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई के उस फतवे की ओर इशारा करता है, जिसमें परमाणु बम को इस्लाम के खिलाफ बताते हुए इसके निर्माण पर रोक लगाई गई है। उन्होंने कहा कि ईरान की परमाणु सुविधाओं पर कड़ी अंतरराष्ट्रीय निगरानी रखी जाती है और उस पर कई प्रतिबंध लगाए गए हैं, जबकि कुछ अन्य देशों के परमाणु कार्यक्रमों पर ऐसी सख्ती नहीं दिखती। उन्होंने आरोप लगाया कि यही अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था का दोहरा रवैया है। डॉ. इलाही ने यह भी कहा कि पिछले साल अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर परमाणु बम विकसित करने का आरोप लगाते हुए ईरानी परमाणु ठिकानों को निशाना बनाया था।
भारत-ईरान के पुराने रिश्तों का जिक्र
इंटरव्यू के दौरान डॉ. इलाही ने भारत और ईरान के ऐतिहासिक संबंधों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के रिश्ते 3000 साल से भी पुराने हैं, यानी इस्लाम के उदय से पहले के। उन्होंने बताया कि उस दौर में भी ईरान में भारत की दार्शनिक पुस्तकों का अध्ययन होता था। उन्होंने चाबहार परियोजना में भारत से सकारात्मक भूमिका की उम्मीद जताते हुए दोनों देशों के सहयोग पर जोर दिया।