Edited By Pardeep,Updated: 26 Jan, 2026 11:13 PM
ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने मध्य पूर्वी समुद्री क्षेत्र में एक बड़ा सैन्य कदम उठाया है। अमेरिका ने सोमवार को बताया कि उसका एक शक्तिशाली नौसैनिक स्ट्राइक ग्रुप, जिसकी अगुवाई एयरक्राफ्ट कैरियर USS Abraham Lincoln कर रहा है, मध्य पूर्व के...
इंटरनेशनल डेस्कः ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने मध्य पूर्वी समुद्री क्षेत्र में एक बड़ा सैन्य कदम उठाया है। अमेरिका ने सोमवार को बताया कि उसका एक शक्तिशाली नौसैनिक स्ट्राइक ग्रुप, जिसकी अगुवाई एयरक्राफ्ट कैरियर USS Abraham Lincoln कर रहा है, मध्य पूर्व के जलक्षेत्र में तैनात कर दिया गया है। यह तैनाती ऐसे समय पर हुई है, जब ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका ने उसके खिलाफ कोई सैन्य कार्रवाई की, तो वह जोरदार जवाब देगा।
ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शन और भारी हिंसा
ईरान में दिसंबर के अंत से सरकार विरोधी प्रदर्शन चल रहे हैं। शुरुआत में ये प्रदर्शन महंगाई और आर्थिक समस्याओं को लेकर हुए थे, लेकिन 8 जनवरी के बाद यह आंदोलन इस्लामिक रिपब्लिक के खिलाफ एक बड़े जनआंदोलन में बदल गया। कई दिनों तक सड़कों पर भारी भीड़ देखने को मिली।
मानवाधिकार संगठनों का आरोप है कि ईरानी सुरक्षा बलों ने इन प्रदर्शनों को दबाने के लिए अभूतपूर्व हिंसा का इस्तेमाल किया। रिपोर्ट के मुताबिक, सुरक्षा बलों ने इंटरनेट बंद होने की स्थिति में सीधे प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चलाईं। ईरान में यह इंटरनेट शटडाउन पिछले 18 दिनों से जारी है, जो अब तक का सबसे लंबा ब्लैकआउट माना जा रहा है।
मरने वालों की संख्या को लेकर अलग-अलग दावे
अमेरिका स्थित मानवाधिकार संगठन Human Rights Activists News Agency (HRANA) ने बताया कि अब तक 5,848 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जिनमें 209 सुरक्षाकर्मी भी शामिल हैं। संगठन का कहना है कि वह अभी 17,091 और संभावित मौतों की जांच कर रहा है, यानी असली आंकड़ा इससे कई गुना ज्यादा हो सकता है।
HRANA के अनुसार, अब तक 41,283 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। वहीं, ईरान सरकार ने पहली बार आधिकारिक आंकड़े जारी करते हुए कहा कि 3,117 लोगों की मौत हुई है। सरकार का दावा है कि इनमें से ज्यादातर सुरक्षाकर्मी या फिर “दंगाइयों” की हिंसा में मारे गए आम नागरिक थे। इंटरनेट निगरानी संस्था NetBlocks ने कहा है कि इंटरनेट बंद होने की वजह से असली हालात दुनिया के सामने नहीं आ पा रहे हैं और सरकार अपने पक्ष का प्रचार कर रही है।
अमेरिका की सैन्य तैनाती और ट्रंप का बयान
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले ही ईरान को चेतावनी दे चुके हैं। पिछले हफ्ते उन्होंने कहा था कि अमेरिका क्षेत्र में एक “भारी भरकम नौसैनिक बेड़ा” भेज रहा है, ताकि किसी भी स्थिति से निपटा जा सके। अब USS Abraham Lincoln के पहुंचने से क्षेत्र में अमेरिका की सैन्य ताकत काफी बढ़ गई है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि यह स्ट्राइक ग्रुप “मध्य पूर्व में सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखने” के लिए तैनात किया गया है।
गौरतलब है कि अमेरिका ने जून में इजरायल के साथ ईरान के खिलाफ 12 दिन चले युद्ध में समर्थन किया था। हालांकि हाल में ट्रंप ने सीधे सैन्य कार्रवाई से थोड़ा पीछे हटने के संकेत दिए हैं, लेकिन उन्होंने इस विकल्प को कभी पूरी तरह खारिज नहीं किया।
ईरान की सख्त चेतावनी
ईरान के विदेश मंत्रालय ने अमेरिका को चेताते हुए कहा है कि किसी भी हमले का “व्यापक और पछतावा कराने वाला जवाब” दिया जाएगा। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि ईरान अपनी सैन्य क्षमताओं पर पूरा भरोसा रखता है और किसी भी दबाव से पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने एयरक्राफ्ट कैरियर की ओर इशारा करते हुए कहा, “ऐसे युद्धपोतों की मौजूदगी ईरान की अपने देश की रक्षा करने की दृढ़ता को कमजोर नहीं कर सकती।”
तेहरान में अमेरिका विरोधी संदेश
ईरान की राजधानी तेहरान के एंगेलाब स्क्वायर में अमेरिका विरोधी एक नया होर्डिंग लगाया गया है, जिसमें एक अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर को नष्ट होते हुए दिखाया गया है। इस पर अंग्रेज़ी में लिखा है— “If you sow the wind, you will reap the whirlwind.” (अगर आप हवा बोएंगे, तो तूफान काटेंगे।) ईरानी नौसेना प्रमुख शहराम ईरानी ने कहा कि ईरान की नौसैनिक शक्ति सिर्फ रक्षात्मक नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने वाली ताकत है।
क्षेत्रीय प्रतिक्रिया और वैश्विक चिंता
लेबनान में ईरान समर्थित संगठन हिज़्बुल्लाह ने ईरान के समर्थन में रैली निकाली। संगठन के नेता नईम कासेम ने चेतावनी दी कि “अगर इस बार ईरान पर युद्ध थोपा गया, तो पूरा क्षेत्र आग में झुलस जाएगा।” वहीं, ईरान के पड़ोसी देश संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने साफ किया है कि वह अपने क्षेत्र से ईरान पर किसी भी हमले की अनुमति नहीं देगा, जबकि वहां अमेरिका का एक बड़ा एयरबेस मौजूद है।
यूरोप से भी सख्त रुख की मांग
इटली के विदेश मंत्री एंटोनियो ताजानी ने यूरोपीय संघ से मांग की है कि ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स को आतंकवादी संगठन घोषित किया जाए, जैसा कि अमेरिका और कनाडा पहले ही कर चुके हैं। उनका कहना है कि प्रदर्शनकारियों की भारी मौतें इस पर कड़ा कदम उठाने की मांग करती हैं।