Edited By Tanuja,Updated: 03 Feb, 2026 07:39 PM

नासा ने Artemis II चंद्र रॉकेट लॉन्च को हाइड्रोजन ईंधन रिसाव के कारण मार्च 2026 तक टाल दिया है। परीक्षण के दौरान महत्वपूर्ण wet dress rehearsal में समस्याएँ सामने आईं। अब डेटा समीक्षा और एक और परीक्षण के बाद लॉन्च की तैयारी की जाएगी। अंतरिक्ष...
Washington: अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने मंगलवार को कहा कि एक दिन पहले किये गए निर्णायक परीक्षण के दौरान ईंधन के रिसाव की समस्या आने के कारण अब वह अपने नये चंद्र रॉकेट को मार्च में प्रक्षेपित करेगी। नासा ने एक बयान में कहा कि प्रक्षेपण में देरी होने से अब उड़ान परीक्षण से पहले डेटा की समीक्षा करने और दूसरा पूर्वाभ्यास करने का मौका मिलेगा। ये रिसाव सोमवार को कैनेडी अंतरिक्ष केंद्र में ईंधन भरने की लंबी प्रक्रिया शुरू होने के कुछ ही घंटों के भीतर हुए। नासा ने कहा कि इस उड़ान के लिए चुने गए चारों अंतरिक्ष यात्रियों को लगभग दो सप्ताह के पृथकवास से बाहर निकाल लिया जाएगा। नासा ने कहा कि चंद्रमा की परिक्रमा के लिए अगली उड़ान के समय से लगभग दो सप्ताह पहले उन्हें फिर से पृथकवास में रखा जाएगा।
हालांकि, अंतरिक्ष एजेंसी ने मार्च में आधिकारिक प्रक्षेपण लक्ष्य के बारे में कोई संकेत नहीं दिया। इसने कहा कि ''जांच से प्राप्त डेटा की पूरी तरह से समीक्षा करने, प्रत्येक समस्या का समाधान करने और परीक्षण पर वापस लौटने'' की आवश्यकता है। सोमवार को दोपहर के समय प्रक्षेपण नियंत्रकों ने 322 फुट (98 मीटर) लंबे रॉकेट में अत्यधिक शीतल हाइड्रोजन और ऑक्सीजन भरना शुरू किया। टंकियों में 7 लाख गैलन (26 लाख लीटर) से अधिक ईंधन भरा जाना था। लेकिन रॉकेट के निचले हिस्से में हाइड्रोजन की मात्रा बहुत अधिक हो गई। हाइड्रोजन भरने की प्रक्रिया को कम से कम दो बार रोकना पड़ा क्योंकि प्रक्षेपण दल ने 2022 की पिछले अंतरिक्ष प्रक्षेपण प्रणाली से संबंधित उलटी गिनती के दौरान विकसित तकनीकों का उपयोग करके समस्या का समाधान ढूंढने का प्रयास किया।
उस उड़ान परीक्षण में हाइड्रोजन रिसाव की समस्या थी और अंततः वह बिना चालक दल के ही उड़ान भरने में सफल रही। नासा ने अपने बयान में यह भी बताया कि परीक्षण के दौरान 'ग्राउंड क्रू' के संचार में ऑडियो में बार-बार रुकावट की समस्या भी आई। इस मिशन के लिए नामित चार अंतरिक्ष यात्रियों - तीन अमेरिकी और एक कनाडाई - ने लगभग 1,000 मील (1,600 किलोमीटर) दूर ह्यूस्टन स्थित जॉनसन अंतरिक्ष केंद्र से महत्वपूर्ण पूर्वाभ्यास की निगरानी की। नासा ने पिछली बार 1960 और 1970 के दशक के अपोलो कार्यक्रम के दौरान अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा पर भेजा था। नये आर्टेमिस कार्यक्रम का लक्ष्य चंद्रमा पर अधिक स्थायी उपस्थिति स्थापित करना है।