Edited By Pardeep,Updated: 03 Feb, 2026 09:30 PM

हिंसा प्रभावित मणिपुर में करीब एक साल के राष्ट्रपति शासन के बाद अब नई सरकार बनने जा रही है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता और विधायक युमनाम खेमचंद सिंह को विधायक दल का नेता चुन लिया गया है। इसका सीधा मतलब है कि वही मणिपुर के अगले...
नेशनल डेस्कः हिंसा प्रभावित मणिपुर में करीब एक साल के राष्ट्रपति शासन के बाद अब नई सरकार बनने जा रही है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता और विधायक युमनाम खेमचंद सिंह को विधायक दल का नेता चुन लिया गया है। इसका सीधा मतलब है कि वही मणिपुर के अगले मुख्यमंत्री होंगे।
यह फैसला मंगलवार को दिल्ली स्थित बीजेपी मुख्यालय में हुई मणिपुर विधायक दल की बैठक में लिया गया। इस बैठक में केंद्रीय पर्यवेक्षक तरुण चुघ, मणिपुर बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष और नॉर्थ-ईस्ट प्रभारी संबित पात्रा मौजूद थे। उन्होंने युमनाम खेमचंद सिंह को पारंपरिक पटका पहनाकर सम्मानित किया और मिठाई खिलाकर बधाई दी। इस मौके पर पूर्व मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह भी मौजूद रहे।
फुटबॉलर के बाद अब ताइक्वांडो खिलाड़ी बनेगा मुख्यमंत्री
मणिपुर की राजनीति में यह एक दिलचस्प संयोग है। पहले राज्य का नेतृत्व एक पूर्व फुटबॉलर एन. बीरेन सिंह कर रहे थे और अब कमान एक अंतरराष्ट्रीय ताइक्वांडो खिलाड़ी के हाथ में जा रही है। युमनाम खेमचंद सिंह ने पहले खेल के मैदान में नाम कमाया और फिर राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाई. अब वे राज्य के सबसे बड़े प्रशासनिक पद तक पहुंचने जा रहे हैं।
बीरेन सरकार में संभाले थे अहम मंत्रालय
युमनाम खेमचंद सिंह वर्तमान में इंफाल वेस्ट के सिंगजामेई विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं। 2022 में बीजेपी की सरकार बनने के बाद वे एन. बीरेन सिंह की कैबिनेट में मंत्री बने और 20 मार्च 2022 से फरवरी 2025 तक निम्न विभागों की जिम्मेदारी संभाली:
इन विभागों को संभालते हुए उन्होंने जमीनी स्तर पर काम किया और प्रशासनिक अनुभव भी हासिल किया।
2017–2022 तक रहे विधानसभा अध्यक्ष
मुख्यमंत्री बनने से पहले युमनाम खेमचंद सिंह का बड़ा राजनीतिक अनुभव रहा है। 2017 से 2022 तक वे मणिपुर विधानसभा के अध्यक्ष (स्पीकर) रहे। बीजेपी संगठन में उन्हें जमीनी स्तर का मजबूत नेता माना जाता है। राजनीति में आने से पहले वे व्यवसाय से जुड़े थे, और उससे पहले पेशेवर ताइक्वांडो खिलाड़ी रहे।
दक्षिण कोरिया से ली मार्शल आर्ट ट्रेनिंग
54 वर्षीय युमनाम खेमचंद सिंह ने दक्षिण कोरिया में ताइक्वांडो की पेशेवर ट्रेनिंग ली। उन्होंने 1977 में ताइक्वांडो सीखना शुरू किया और अगले 20 वर्षों तक इस खेल से जुड़े रहे। इसके अलावा कई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व किया। भारतीय ताइक्वांडो टीम के कप्तान भी रहे। देश के अलग-अलग राज्यों में इस खेल को बढ़ावा देने का काम किया।
5वीं डैन ब्लैक बेल्ट से सम्मानित
हाल ही में उन्हें सियोल (दक्षिण कोरिया) स्थित ग्लोबल ट्रेडिशनल ताइक्वांडो फेडरेशन ने पारंपरिक ताइक्वांडो में प्रतिष्ठित 5वीं डैन ब्लैक बेल्ट से सम्मानित किया। यह सम्मान उनके अनुशासन, समर्पण और वर्षों की मेहनत का प्रतीक माना जाता है। खिलाड़ी होने के बाद वे खेल प्रशासक भी बने, ताइक्वांडो फेडरेशन ऑफ इंडिया (TFI) के उपाध्यक्ष रहे और पूर्वोत्तर भारत में ताइक्वांडो को संस्थागत रूप देने में अहम भूमिका निभाई।
कोच से नेता तक का सफर
1982 में उन्होंने असम ताइक्वांडो एसोसिएशन की स्थापना की और करीब नौ साल तक गुवाहाटी में रहे.
1992 में मणिपुर लौटने के बाद:
राजनीति में एंट्री (2012)
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2012 में पहली बार चुनाव लड़ा — तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर
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सिर्फ 157 वोटों से हार गए
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इसके बाद बीजेपी में शामिल हो गए
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आरएसएस के करीब आए और मणिपुर में संघ की शाखाओं में भी सक्रिय रहे
उन्हें ही क्यों चुना गया मुख्यमंत्री?
युमनाम खेमचंद सिंह को मणिपुर का मुख्यमंत्री बनाने के पीछे कई राजनीतिक कारण बताए जा रहे हैं:
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सभी गुटों के लिए स्वीकार्य नेता — पार्टी के भीतर किसी बड़े विवाद से नहीं जुड़े.
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साफ छवि — भ्रष्टाचार या बड़े आरोपों से दूर रहे.
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शांत और अनुशासित नेतृत्व शैली — बड़े भाषणों की जगह संगठन और काम पर जोर देते हैं.
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अनुभवी प्रशासक — मंत्री और विधानसभा अध्यक्ष दोनों रह चुके हैं.
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संतुलन का चेहरा — हिंसा के बाद राज्य को स्थिर नेतृत्व की जरूरत थी.