Edited By Parveen Kumar,Updated: 13 Mar, 2026 06:19 PM

मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने ईरान की सैन्य ताकत को लेकर बड़ा दावा किया है। अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने शुक्रवार को कहा कि अमेरिका और इज़राइल के लगातार हमलों के बाद ईरान की सैन्य क्षमताएँ काफी हद तक कमजोर हो चुकी हैं। उन्होंने यह...
इंटरनेशनल डेस्क : मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने ईरान की सैन्य ताकत को लेकर बड़ा दावा किया है। अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने शुक्रवार को कहा कि अमेरिका और इज़राइल के लगातार हमलों के बाद ईरान की सैन्य क्षमताएं काफी हद तक कमजोर हो चुकी हैं। उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा हालात में ईरान की रक्षा व्यवस्था लगभग टूट चुकी है और उसके पास प्रभावी सैन्य विकल्प बहुत कम बचे हैं।
पेंटागन ब्रीफिंग में बड़ा दावा
पेंटागन में आयोजित प्रेस ब्रीफिंग के दौरान हेगसेथ ने कहा कि अमेरिका और इज़राइल की संयुक्त सैन्य कार्रवाई का ईरान की सैन्य ताकत पर गहरा असर पड़ा है। उनके मुताबिक अब ईरान के पास प्रभावी हवाई सुरक्षा प्रणाली नहीं बची है। साथ ही उन्होंने यह भी दावा किया कि ईरान की वायु सेना और नौसेना भी अब लगभग निष्क्रिय हो चुकी है।
मिसाइल और ड्रोन क्षमता में भारी गिरावट
हेगसेथ ने बताया कि लगातार हमलों के कारण ईरान की मिसाइल क्षमता में करीब 90 प्रतिशत की गिरावट आई है। इसके अलावा ईरान के एकतरफा हमला करने वाले ड्रोन भी लगभग 95 प्रतिशत तक कम हो गए हैं। उन्होंने कहा कि इन हालात के चलते ईरान अब होर्मुज़ जलडमरूमध्य में भी हताशा भरे कदम उठा रहा है, जिनसे निपटने के लिए अमेरिकी और सहयोगी सेनाएँ सक्रिय हैं।
हजारों ठिकानों पर हुए हमले
अमेरिकी रक्षा सचिव के अनुसार, अमेरिका और इज़राइल की वायु सेनाओं ने मिलकर ईरान के हजारों सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। उन्होंने बताया कि अब तक दुश्मन के 15,000 से ज्यादा ठिकानों पर हमले किए जा चुके हैं और यह अभियान लगातार जारी है। उनके मुताबिक यह औसतन हर दिन एक हजार से भी ज्यादा हमलों के बराबर है।
आगे की रणनीति भी साफ
हेगसेथ ने स्पष्ट किया कि अमेरिका की रणनीति ईरान की सभी महत्वपूर्ण सैन्य क्षमताओं को पूरी तरह खत्म करने की है। उन्होंने कहा कि अमेरिका और उसके सहयोगी बेहद तेज़ रफ्तार से कार्रवाई कर रहे हैं और दुनिया ने इस तरह की सैन्य गति पहले कभी नहीं देखी। उनका दावा है कि बहुत जल्द ईरान की रक्षा से जुड़ी सभी प्रमुख कंपनियों और सैन्य ढांचे को भी पूरी तरह निष्क्रिय कर दिया जाएगा।