पाकिस्तान में आटे का बड़ा संकट! 40% फ्लोर मिलें बंद, पंजाब सरकार पर फूटा गुस्सा

Edited By Updated: 21 May, 2026 07:52 PM

pakistan flour crisis in punjab province deepens as 40 mills shut down

पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में आटा संकट गहरा गया है। रावलपिंडी-इस्लामाबाद क्षेत्र की लगभग 40% फ्लोर मिलें भारी घाटे और सरकारी नीतियों के कारण बंद हो चुकी हैं। मिल मालिकों ने चेतावनी दी है कि यदि गेहूं वितरण व्यवस्था नहीं बदली गई तो और मिलें बंद हो...

International Desk:  पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में आटा संकट तेजी से गहराता जा रहा है। रावलपिंडी और इस्लामाबाद क्षेत्र में करीब 40 प्रतिशत फ्लोर मिलें भारी आर्थिक नुकसान के कारण बंद हो चुकी हैं। उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि अगर सरकार ने जल्द सुधार नहीं किए तो हालात और खराब हो सकते हैं।पाकिस्तानी अखबार Dawn की रिपोर्ट के मुताबिक, फ्लोर मिल मालिकों ने पंजाब सरकार की नीतियों को इस संकट के लिए जिम्मेदार ठहराया है। पूर्व उपाध्यक्ष Pakistan Flour Mills Association चौधरी अफजल महमूद एडवोकेट ने पंजाब की मुख्यमंत्री मरियम नवाज  को संबोधित एक अपील में कहा कि सरकार की “गलत और असंगत नीतियां” पूरे उद्योग को तबाही की ओर धकेल रही हैं। यह बयान व्हाट्सएप ग्रुप्स के जरिए फ्लोर मिल मालिकों में व्यापक रूप से साझा किया गया।


 
मिल मालिकों का आरोप है कि दक्षिणी पंजाब के गेहूं उत्पादक जिलों को प्राथमिकता दी जा रही है, जबकि रावलपिंडी-इस्लामाबाद क्षेत्र की मिलों को निजी सप्लायरों से महंगे दामों पर गेहूं खरीदना पड़ रहा है। परिवहन लागत के कारण प्रति मन 200 से 250 पाकिस्तानी रुपये अतिरिक्त खर्च बढ़ रहा है। गेहूं की कीमत लगभग 4,100 रुपये प्रति मन तक पहुंच चुकी है। लेकिन सरकार आटा करीब 4,000 रुपये प्रति मन बेचने का दबाव बना रही है। मिल मालिकों का कहना है कि बिजली बिल, कर्मचारियों के वेतन और अन्य खर्च जोड़ने के बाद यह मॉडल पूरी तरह घाटे का सौदा बन गया है। उद्योग प्रतिनिधियों ने खाद्य विभाग पर मनमाने नियंत्रण और रोज नई नीतियां थोपने का आरोप लगाया है।

 

उन्होंने कहा कि कई मिलों को हर चार दिन में सिर्फ 40 टन गेहूं आवंटित किया जा रहा है, जो संचालन जारी रखने के लिए बेहद कम है। मिल मालिकों का दावा है कि उद्योग में लगाया गया अरबों रुपये का निवेश बर्बाद हो चुका है। कई फैक्ट्रियां बंद होने से हजारों मजदूरों और कर्मचारियों की नौकरियां खतरे में पड़ गई हैं। फ्लोर मिल उद्योग ने पंजाब सरकार से मांग की है कि पूरे पंजाब में समान आटा मूल्य प्रणाली लागू की जाए। गेहूं वितरण में भेदभाव खत्म हो। प्रशासनिक नियंत्रण कम कर बाजार आधारित व्यवस्था लागू की जाए। उद्योग का कहना है कि यही कदम इस संकटग्रस्त सेक्टर को स्थिर कर सकते हैं। पाकिस्तान पहले से ही महंगाई, ऊर्जा संकट और खाद्य अस्थिरता से जूझ रहा है। अब आटा उद्योग में बढ़ता संकट आम लोगों के लिए रोटी की कीमत और उपलब्धता दोनों पर असर डाल सकता है। 

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