बांग्लादेश का शिपब्रेकिंग यार्ड बना मौत का जाल; जहरीली गैस ने ली 9 मजदूरों की जान, सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल

Edited By Updated: 16 Aug, 2026 12:30 PM

shipbreaking yard tragedy triggers safety concerns in bangladesh

बांग्लादेश के सिटाकुंड स्थित फर्डौस स्टील शिपब्रेकिंग यार्ड में जहरीली हाइड्रोजन सल्फाइड गैस की चपेट में आने से 9 मजदूरों की मौत हो गई और 10 घायल हुए। जांच में जहाज के अंदर गैस मिली। हादसे के बाद तीन जांच समितियां बनाई गई हैं और सिटाकुंड के...

Dhaka: बांग्लादेश के शिपब्रेकिंग यार्ड में जहरीली गैस के कहर  से  9 मजदूरों की मौत और 10 घायल  होने के मामले ने देश को झझकोर कर रख दिया है। ये हादसा बांग्लादेश के सिटाकुंड स्थित शिपब्रेकिंग यार्ड में   हुआ जिसने पूरे उद्योग की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शुक्रवार को फर्डौस स्टील शिपब्रेकिंग यार्ड में एक जहाज के अंदर सफाई का काम कर रहे मजदूर जहरीली हाइड्रोजन सल्फाइड गैस की चपेट में आ गए। हादसे में 9 मजदूरों की मौत हो गई, जबकि 10 अन्य घायल हुए हैं। जांच में जहाज के अंदर खतरनाक गैस की मौजूदगी भी सामने आई है।
 

 हादसे के वक्त गैस की मात्रा...
हादसा शुक्रवार सुबह उस समय हुआ जब मजदूर जहाज के अंदर हाउसकीपिंग और सफाई का काम कर रहे थे। बताया गया कि जहाज के अंदर लंबे समय से जमा हाइड्रोजन सल्फाइड गैस (H₂S) की उच्च सांद्रता ने मजदूरों को अपनी चपेट में ले लिया। यह गैस बेहद जहरीली होती है और अधिक मात्रा में सांस के जरिए शरीर में जाने पर कुछ ही समय में जानलेवा साबित हो सकती है। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और कई मजदूरों को बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया। हादसे के करीब चार घंटे बाद शनिवार को विभागीय विस्फोटक विभाग की टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण किया।जांच के दौरान जहाज के अंदर 10.8 पार्ट्स प्रति मिलियन (ppm) हाइड्रोजन सल्फाइड गैस पाई गई।अधिकारियों को आशंका है कि हादसे के वक्त गैस की मात्रा इससे कहीं ज्यादा रही होगी।अधिकारियों के मुताबिक, गैस की सांद्रता हादसे के समय 100 ppm से अधिक हो सकती थी। इतनी अधिक मात्रा में गैस के संपर्क में आने से व्यक्ति की हालत बेहद तेजी से बिगड़ सकती है और गंभीर स्थिति में कुछ ही मिनटों में मौत भी हो सकती है।


 
मजदूरों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ी
हादसे में अब तक 9 मजदूरों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि 10 अन्य घायल बताए जा रहे हैं। घटना ने एक बार फिर सिटाकुंड के शिपब्रेकिंग उद्योग में काम करने वाले मजदूरों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। मजदूर संगठनों का आरोप है कि कई यार्डों में सुरक्षा मानकों का पर्याप्त पालन नहीं किया जाता, जिसके कारण बार-बार जानलेवा दुर्घटनाएं होती हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए हादसे की जांच के लिए तीन अलग-अलग समितियां बनाई गई हैं। उद्योग मंत्रालय ने अतिरिक्त सचिव की अध्यक्षता में 11 सदस्यीय समिति बनाई है। वहीं चटगांव जिला प्रशासन ने अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट की अध्यक्षता में 9 सदस्यीय समिति गठित की है।  इसके अलावा बांग्लादेश शिप ब्रेकर्स एंड रीसाइक्लर्स एसोसिएशन (BSBRA) ने भी पांच सदस्यीय जांच समिति बनाई है। इन समितियों का उद्देश्य हादसे की वजह, सुरक्षा व्यवस्था और जिम्मेदारी तय करना है।

 

9 साल 9 महीने में सैंकड़ों मजदूरों की मौत
  शिपब्रेकिंग वर्कर्स ट्रेड यूनियन फोरम के अनुसार, 2015 से अब तक करीब 9 साल 9 महीने में सिटाकुंड के शिपब्रेकिंग यार्डों में विभिन्न दुर्घटनाओं में कम से कम 137 मजदूरों की मौत हुई है। इसी अवधि में 239 मजदूर घायल होने का भी दावा किया गया है। आंकड़ों के मुताबिक 2015 में 16, 2016 में 18, 2017 में 19, 2018 में 13 और 2019 में 23 मजदूरों की मौत हुई। 2020 में 10, 2021 में 13, 2022 में 7, 2023 में 7, 2024 में 7 और 2025 में 4 मजदूरों की मौत का दावा किया गया है। सिटाकुंड का शिपब्रेकिंग उद्योग सिर्फ मजदूरों की सुरक्षा के कारण ही सवालों में नहीं है। जहाजों को तोड़ने की प्रक्रिया से हवा, समुद्री पानी और तटीय पर्यावरण में प्रदूषण का खतरा भी लंबे समय से बना हुआ है।बांग्लादेश के पर्यावरण विभाग ने 26 अप्रैल 2024 को चटगांव के शिपब्रेकिंग उद्योग को ‘रेड कैटेगरी’ में रखा था।इसका मतलब है कि इस उद्योग को पर्यावरण की दृष्टि से उच्च जोखिम वाले उद्योगों में माना जाता है।


 
बांग्लादेश में शिपब्रेकिंग का काम 1971 के बाद शुरू हुआ और 1980 के बाद तेजी से बढ़ा। आज सिटाकुंड के समुद्र तट पर फैले यार्डों में हर साल करीब 80 से 90 जहाजों को तोड़ा जाता है।ये यार्ड फौजदारहाट से सिटाकुंड तक करीब 20 मील से ज्यादा लंबे तटीय क्षेत्र में फैले हुए हैं।उद्योग से जुड़े अनुमानों के अनुसार, इन यार्डों से हर साल 15 लाख टन से ज्यादा स्क्रैप आयरन निकलता है।  उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि सिटाकुंड में केवल कुछ यार्डों के पास ही पर्यावरणीय मानकों से जुड़े ग्रीन सर्टिफिकेट हैं। शिपब्रेकिंग विशेषज्ञ मोहम्मद अली शाहिन के मुताबिक, कुछ यार्ड ग्रीन सर्टिफिकेशन हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन केवल प्रमाणपत्र हासिल करना पर्याप्त नहीं है। 
 

 

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