Edited By Tanuja,Updated: 03 Mar, 2026 07:39 PM

चीन ने अमेरिका-इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों की कड़ी निंदा करते हुए इसे संप्रभुता का उल्लंघन बताया है। बीजिंग ने खाड़ी देशों से “विदेशी हस्तक्षेप” का विरोध करने का आह्वान किया। हमलों में एक चीनी नागरिक की मौत हुई, जबकि 3,000 से अधिक नागरिकों को...
International Desk: मिडल ईस्ट में बढ़ते युद्ध तनाव के बीच चीन ने स्पष्ट शब्दों में अमेरिका और इजरायल की संयुक्त सैन्य कार्रवाई की आलोचना की है। बीजिंग ने इन हमलों को “ईरान की संप्रभुता और सुरक्षा का गंभीर उल्लंघन” बताया और कहा कि यह संयुक्त राष्ट्र चार्टर के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है। Ministry of Foreign Affairs of the People's Republic of China की प्रवक्ता माओ निंग ने कहा कि चीन को हमलों की पूर्व जानकारी नहीं दी गई थी। यह कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है।
चीन के विदेश मंत्री वांग यी (Wang Yi) ने ओमान के विदेश मंत्री बद्र बिन हमद अल बुसैदी ( Badr bin Hamad Al Busaidi) और ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ( Abbas Araghchi )से फोन पर बातचीत की।उन्होंने खाड़ी देशों से “अपनी संप्रभुता और राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा” करने और “विदेशी हस्तक्षेप का विरोध” करने का आह्वान किया। aरॉयटर्स के अनुसार, तेहरान पर हमलों में एक चीनी नागरिक की मौत हुई है। चीन के विदेश मंत्रालय ने बताया कि 2 मार्च तक 3,000 से अधिक चीनी नागरिकों को ईरान से सुरक्षित निकाला जा चुका है।बता दें कि अमेरिका और Israel ने 28 फरवरी से ईरान पर हमले शुरू किए, जिनमें ईरान के सर्वोच्च नेता की मौत हुई। ईरान और उसके सहयोगी संगठनों, जैसे Hezbollah, ने जवाबी हमले किए हैं। संघर्ष अब खाड़ी के कई बड़े शहरों दुबई, अबू धाबी और दोहा तक फैल चुका है।
वांग यी ने अपने बयान में कहा कि “हालिया अमेरिकी कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है और ईरान की लाल रेखाओं को पार करती है। लेकिन क्षेत्रीय शांति के लिए बातचीत जरूरी है।” चीन ने संकेत दिया है कि वह तनाव कम करने में “सकारात्मक भूमिका” निभाना चाहता है। अमेरिका-इजरायल की सैन्य कार्रवाई का विरोध कर रहा है, लेकिन साथ ही क्षेत्रीय देशों से संयम और वार्ता का रास्ता अपनाने की अपील भी कर रहा है। बीजिंग के लिए यह सिर्फ कूटनीति नहीं, बल्कि ऊर्जा सुरक्षा और अरबों डॉलर के आर्थिक हितों का सवाल भी है।
चीन के आर्थिक हित क्यों अहम ?
चीन ईरान और कई खाड़ी देशों का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। ऊर्जा आयात का बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से लेता है। वैश्विक व्यापार मार्गों और तेल आपूर्ति पर निर्भर है। Oman, जो होर्मुज जलडमरूमध्य के पास स्थित है, लंबे समय से अमेरिका-ईरान वार्ता में मध्यस्थ की भूमिका निभाता रहा है।ओमान ने 2015 के Joint Comprehensive Plan of Action (JCPOA) समझौते के दौरान भी अहम भूमिका निभाई थी।