2025 बना तीसरा सबसे गर्म साल, समुद्री गर्मी ने भी तोड़े रिकॉर्ड

Edited By Updated: 01 Apr, 2026 11:00 AM

2025 becomes the third hottest year rajeev aacharya

प्रसिद्ध पर्यावरणविद राजीव आचार्य कहते है कि वर्ष 2025 वैश्विक स्तर पर तीसरा सबसे गर्म साल दर्ज किया गया है। अमेरिकी एजेंसी NOAA (नेशनल ओशियानिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन) की एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार 1850 के बाद से तापमान रिकॉर्ड में यह वर्ष...

नेशनल डेस्क। प्रसिद्ध पर्यावरणविद राजीव आचार्य कहते है कि वर्ष 2025 वैश्विक स्तर पर तीसरा सबसे गर्म साल दर्ज किया गया है। अमेरिकी एजेंसी NOAA (नेशनल ओशियानिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन) की एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार 1850 के बाद से तापमान रिकॉर्ड में यह वर्ष गर्मी के लिहाज से तीसरे स्थान पर रहा। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि 2025 में ऊपरी समुद्री हिस्से (अपर ओशन) का हीट कंटेंट अब तक के सबसे उच्च स्तर पर पहुंच गया जो समुद्री पारिस्थितिकी और जलवायु संतुलन के लिए चिंता का विषय है। राजीव आचार्य नेशनल ओशियानिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन की रिपोर्ट का उल्लेख करते हुए कहते है कि आर्कटिक और अंटार्कटिक दोनों क्षेत्रों में समुद्री बर्फ का वार्षिक विस्तार रिकॉर्ड के तीन सबसे निचले स्तरों में शामिल रहा। वहीं उत्तरी गोलार्ध में हिम आवरण (स्नो कवर) भी तीसरे सबसे कम स्तर पर दर्ज किया गया। 

मौसम में बदलाव की घटनाओं में भी इजाफा देखा गया। वर्ष 2025 में दुनियाभर में 101 नामित उष्णकटिबंधीय तूफान (ट्रॉपिकल स्टॉर्म) दर्ज किए गए जो औसत से अधिक हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि समुद्र के तापमान में लगातार बढ़ोतरी और बर्फ के पिघलने की रफ्तार जलवायु परिवर्तन के गंभीर संकेत हैं। 

दिसंबर 2025 भी रहा अधिक गर्म

वैश्विक जलवायु पर बढ़ते संकट के बीच दिसंबर 2025 भी असामान्य रूप से गर्म रहा। इस दौरान वैश्विक सतह तापमान 20वीं सदी के औसत से 1.05 डिग्री सेल्सियस अधिक दर्ज किया गया जिससे यह अब तक का पांचवां सबसे गर्म दिसंबर बन गया। रिपोर्ट के अनुसार इस अवधि में आर्कटिक और उत्तरी गोलार्ध के अधिकांश हिस्सों में व्यापक रूप से अधिक गर्मी देखी गई। दिसंबर 2025 में उत्तरी गोलार्ध में बर्फ का विस्तार 60 वर्षों के रिकॉर्ड में पांचवां सबसे कम रहा।

जलवायु आपातकाल की ओर बढ़ रही धरती

पृथ्वी का जलवायु संतुलन अब रिकॉर्ड स्तर पर बिगड़ चुका है और यह स्थिति मानव इतिहास में पहले कभी नहीं देखी गई। World Meteorological Organization की ‘स्टेट ऑफ द ग्लोबल क्लाइमेट 2025’ रिपोर्ट में यह गंभीर चेतावनी दी गई है। Antonio Guterres की मार्च 2026 में प्रकाशित रिपोर्ट में चिंता जताते हुए कहा कि “वैश्विक जलवायु आपातकाल की स्थिति में है और पृथ्वी को उसकी सीमाओं से आगे धकेला जा रहा है। हर प्रमुख जलवायु संकेतक खतरे की घंटी बजा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार 2015 से 2025 तक के 11 साल अब तक के सबसे गर्म वर्ष रहे हैं। वर्ष 2025 वैश्विक तापमान के लिहाज से दूसरा या तीसरा सबसे गर्म साल रहा जिसमें तापमान 1850-1900 के औसत से करीब 1.43 डिग्री सेल्सियस अधिक दर्ज किया गया। 

वैज्ञानिकों के अनुसार महासागर लगातार गर्म हो रहे हैं और कार्बन डाइऑक्साइड को बड़ी मात्रा में अवशोषित कर रहे हैं। पिछले दो दशकों में महासागर हर साल मानव ऊर्जा उपयोग के मुकाबले लगभग 18 गुना अधिक ऊष्मा सोख रहे हैं। राजीव आचार्य कहते है कि ग्लोबल वार्मिंग की इस चुनौती से निपटने के लिए सबसे महत्वपूर्ण कदम है वृक्षारोपण । मत्स्य पुराण में कहा गया है कि एक तालाब 10 कुओं के बराबर होता है एक जलाशय 10 तालाबों के बराबर होता है। एक पुत्र 10 जलाशयों के बराबर होता है, और एक वृक्ष 10 पुत्रों के बराबर होता है!

दशसुपासमा वापि दशवापसमो हृद:।
दशह्रदसमः पुत्रो दशपुत्रसमो द्रुमः ॥
दशा-कुप-सम वापी, दशा-वापी-समो ह्रद: |
दशा-ह्रद-समः पुत्रो, दशा-पुत्र-समो द्रुमः ||

इसलिए अधिक से अधिक मात्रा में वृक्षों को लगाना चाहिए । प्रत्येक व्यक्ति को यह प्रण लेना चाहिए कि वह स्वयं वृक्षों को लगाएगा उनकी रक्षा करेगा और बाकी लोगों को भी प्रेरित करेगा । तभी हम अपनी इस धरती की रक्षा कर सकते हैं।

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