पंजाब में 3 महीनों में 34 Encounters, उठने लगे सवाल,  सरकार ने Human Rights कमिशन के नोटिस का भी नहीं दिया जवाब

Edited By Updated: 19 Feb, 2026 10:54 AM

34 encounters in punjab in 3 months

पंजाब में बीते तीन महीनों के दौरान पुलिस और कथित गैंगस्टरों के बीच हुए Encounters को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

पंजाब डेस्कः पंजाब में बीते तीन महीनों के दौरान पुलिस और कथित गैंगस्टरों के बीच हुए Encounters को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। एक जांच रिपोर्ट के मुताबिक नवंबर 2025 से जनवरी 2026 के बीच राज्य में 34 एनकाउंटर दर्ज किए गए, जिनमें कई घटनाएं उस समय हुईं जब आरोपी पुलिस हिरासत में थे या ‘रिकवरी’ के लिए ले जाए जा रहे थे।

एक अंग्रेज़ी अखबार में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार पंजाब के डीजीपी गौरव यादव ने पहले दिए अपने बयान में कहा था कि अप्रैल 2022 से राज्य में पुलिस ने गैंगस्टरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए 324 से अधिक मुठभेड़ की हैं, जिनमें 24 लोगों की मौत हुई और 515 से ज्यादा आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। डीजीपी के अनुसार गिरफ्तार 515 आरोपियों में से 319 को गोली लगने से चोटें आईं। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने इन घटनाओं को लेकर पंजाब के गृह सचिव को नोटिस जारी कर “राज्य द्वारा स्वीकृत गैर-न्यायिक हत्याएं” के आरोपों पर एक्शन टेकन रिपोर्ट मांगी थी। हालांकि नोटिस जारी होने के महीनों बाद भी राज्य सरकार ने इस पर औपचारिक जवाब दाखिल नहीं किया है। रिपोर्ट में बताया गया है कि नवंबर 2025 से जनवरी 2026 के बीच दर्ज मुठभेड़ों में कई मामलों में पुलिस का दावा रहा कि आरोपियों ने ‘रिकवरी’ या गिरफ्तारी के दौरान हथियार निकालकर फायरिंग की, जिसके जवाब में आत्मरक्षा में गोली चलानी पड़ी। कई मामलों में पुलिस ने कहा कि आरोपियों ने भागने की कोशिश की या पुलिस टीम पर हमला किया, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई की गई।

पुलिस का कहना है कि इन ऑपरेशनों का उद्देश्य गैंगवार और बढ़ती फायरिंग की घटनाओं पर नियंत्रण पाना था। वहीं आलोचकों का आरोप है कि बार-बार हो रही मुठभेड़ें और हिरासत के दौरान गोली लगने की घटनाएं पारदर्शिता पर सवाल खड़े करती हैं। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि कई मामलों में मजिस्ट्रियल जांच की आवश्यकता बताई गई है, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुसार हर मुठभेड़ की स्वतंत्र जांच जरूरी होती है। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि मुठभेड़ ‘क्लीन’ भी हो, तब भी निष्पक्ष जांच अनिवार्य है।

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