AI Impact Summit 2026: भारत मंडपम में गूंजा PM मोदी का मंत्र- 'टेक्नोलॉजी बनाना और अपनाना दोनों भारत के DNA में'

Edited By Updated: 19 Feb, 2026 11:06 AM

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राजधानी दिल्ली का भारत मंडपम आज एक ऐसे भविष्य का गवाह बन रहा है, जहां कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की दिशा और दशा तय की जा रही है। 'India AI Impact Summit 2026' के चौथे दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुनिया को स्पष्ट संदेश दिया कि भारत अब केवल तकनीक...

 नेशनल डेस्क: राजधानी दिल्ली का भारत मंडपम आज एक ऐसे भविष्य का गवाह बन रहा है, जहां कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की दिशा और दशा तय की जा रही है। 'India AI Impact Summit 2026' के चौथे दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुनिया को स्पष्ट संदेश दिया कि भारत अब केवल तकनीक का उपभोक्ता नहीं, बल्कि एक प्रमुख निर्माता बनकर उभरा है। इस शिखर सम्मेलन ने साबित कर दिया है कि वैश्विक मंच पर AI को लेकर होने वाली चर्चाएं अब भारत के बिना अधूरी हैं। इसी के साथ पीएम मोदी ने कहा, टेक्नोलॉजी बनाना और अपनाना दोनों भारत के DNA में है।

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प्रधानमंत्री Narendra Modi ने गुरुवार को नई दिल्ली में आयोजित AI Impact Summit में तेजी से उभरती कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के लिए मानव-केंद्रित और समावेशी दृष्टिकोण का आह्वान किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि एआई का उद्देश्य 'AI-केंद्रित' न होकर 'मानव-केंद्रित' होना चाहिए। उन्होंने इस दिशा में AI शासन के लिए ‘MANAV’ फ्रेमवर्क पेश किया।

 MANAV फ्रेमवर्क के मुख्य अंश

प्रधानमंत्री ने एआई को मानव कल्याण और समावेशी मॉडल के रूप में विकसित करने के लिए MANAV के पांच स्तंभ बताए:-

M – Moral (नैतिक): AI प्रणालियों का मार्गदर्शन नैतिक जिम्मेदारी और मूल्यांकन से होना चाहिए।

A – Accountable (जवाबदेह): शासन व्यवस्था पारदर्शिता, नियमों और निगरानी के साथ जवाबदेही सुनिश्चित करे।

N – National Sovereignty (राष्ट्रीय संप्रभुता): किसी देश में उत्पन्न डेटा उसी देश का होना चाहिए और उसके नियंत्रण में रहना चाहिए।

A – Accessible & Inclusive (सुलभ और समावेशी): AI प्रणाली समाज के सभी वर्गों के लिए सुलभ हो और समावेशिता को बढ़ावा दे।

V – Valid (वैध और विश्वसनीय): AI कानूनन वैध, भरोसेमंद और प्रमाण्य हो।

प्रधानमंत्री का संदेश: 
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “सभी के लिए कल्याण और सभी के लिए खुशहाली हमारी मापदंड है। मनुष्य केवल डेटा पॉइंट या AI के लिए कच्चा माल नहीं बनना चाहिए। हमें AI को विकसित होने के लिए खुला क्षेत्र देना चाहिए, लेकिन नियंत्रण हमारे हाथ में रहना चाहिए।” प्रधानमंत्री ने मानव-केंद्रित दृष्टिकोण पर जोर देते हुए कहा कि एआई का विकास लोकतांत्रिक, पारदर्शी और समावेशी होना चाहिए, ताकि तकनीक समाज के प्रत्येक हिस्से के लिए लाभकारी बने।

वैश्विक दिग्गजों का जमावड़ा और भारत की डिजिटल शक्ति
Summit के इस औपचारिक उद्घाटन सत्र में दुनिया के शक्तिशाली नेताओं की मौजूदगी ने भारत की बढ़ती साख पर मुहर लगा दी। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने भारत के अद्वितीय डिजिटल इकोसिस्टम और पेमेंट सिस्टम की मुक्तकंठ से सराहना की। वहीं, संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने एक बड़ा बयान देते हुए चेतावनी दी कि AI का भविष्य मुट्ठी भर अरबपतियों की इच्छा पर निर्भर नहीं होना चाहिए। उन्होंने इस तकनीक में 'ग्लोबल साउथ' (विकासशील देशों) की बढ़ती भागीदारी को सराहा, जिसमें भारत नेतृत्वकारी भूमिका निभा रहा है।

विशाखापत्तनम से लेकर वैश्विक मंच तक: सुंदर पिचाई का विजन
गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई ने समिट को संबोधित करते हुए भारत के बदलते तकनीकी परिदृश्य पर आश्चर्य जताया। उन्होंने विशेष रूप से विशाखापत्तनम (विजाग) का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि यह शहर एआई डेवलपमेंट के केंद्र के रूप में उभरेगा, लेकिन आज यह हकीकत है। पिचाई के अनुसार, भारत इस वक्त एक बहुत बड़ी तकनीकी छलांग लगाने की दहलीज पर खड़ा है।

प्रधानमंत्री मोदी का आज का शेड्यूल
प्रधानमंत्री मोदी का आज का शेड्यूल काफी व्यस्त है। वे सुबह 'AI Impact Expo' का दौरा कर नई खोजों का जायजा लेंगे। दोपहर में आयोजित 'लीडर्स प्लेनरी' में विभिन्न देशों के राष्ट्राध्यक्षों और मंत्रियों के साथ मिलकर एआई गवर्नेंस, इंफ्रास्ट्रक्चर और अंतरराष्ट्रीय सहयोग जैसे गंभीर मुद्दों पर चर्चा करेंगे। शाम को होने वाली 'CEO राउंडटेबल' में उद्योगों के दिग्गजों के साथ निवेश और सप्लाई चेन पर मंथन होगा। इस महाकुंभ में 500 से ज्यादा विशेषज्ञ और 20 से अधिक देशों के राष्ट्राध्यक्षों की भागीदारी यह बताने के लिए काफी है कि भारत अब एआई की वैश्विक बिसात का सबसे अहम खिलाड़ी बन चुका है।

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