ह+त्या मामले में लॉरेंस बिश्नोई बरी! चंडीगढ़ कोर्ट का 7 साल पुराने केस में बड़ा फैसला

Edited By Updated: 19 Feb, 2026 02:13 PM

lawrence bishnoi case

शहर में चर्चा में रहे राजवीर सिंह उर्फ़ सोनू शाह हत्या केस में जिला अदालत ने बड़ा फैसला सुनाते ...

पंजाब डेस्कः शहर में चर्चा में रहे राजवीर सिंह उर्फ़ सोनू शाह हत्या केस में जिला अदालत ने बड़ा फैसला सुनाते हुए गैंगस्टर लॉरेंस बिशनोई समेत पांच आरोपियों को सबूतों की कमी के कारण बरी कर दिया। वहीं, लॉरेंस गैंग से जुड़े तीन अन्य आरोपियों को दोषी ठहराया गया। दोषियों की सजा पर अदालत 20 फरवरी को फैसला सुनाएगी। चंडीगढ़ पुलिस की अपराध शाखा ने सितंबर 2019 में जांच के बाद लॉरेंस बिशनोई समेत आठ लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। आरोप लगाया गया था कि यह हत्या जेल से संचालित नेटवर्क के जरिए योजनाबद्ध तरीके से करवाई गई। अदालत ने लॉरेंस बिशनोई, धर्मिंदर सिंह, अभिषेक उर्फ़ बंटी, राजू बसोदी और दीपक रंगा को बरी कर दिया, जबकि शुभम उर्फ़ बिगनी, मनजीत उर्फ़ मोटा और राजन उर्फ़ जाट को दोषी ठहराया। बरी किए गए और दोषी ठहराए गए लोग चंडीगढ़, दिल्ली, अंबाला और गुजरात की विभिन्न जेलों में बंद हैं।

यह था मामला
28 सितंबर, 2019 को सेक्टर-45, बुरैल गांव में प्रॉपर्टी डीलर राजवीर सिंह उर्फ़ सोनू शाह का उनके ऑफिस में गोली मारकर कत्ल कर दिया गया। हमलावरों ने लगभग 14 राउंड फायर किए थे। इस घटना में सोनू शाह के साथ ही जोगिंदर सिंह और परमिंदर घायल हो गए थे। हत्या के बाद सोशल मीडिया पर एक वॉइस मैसेज सामने आया, जिसमें कथित तौर पर राजू बसोदी ने बिशनोई गैंग की तरफ से हत्या की जिम्मेदारी ली थी।

ट्रायल के दौरान क्या हुआ
ट्रायल के दौरान मुख्य चश्मदीद गवाह और घायल जोगिंदर सिंह को पुलिस अदालत में पेश नहीं कर सकी। पुलिस यह भी स्पष्ट नहीं कर सकी कि घटना का मुख्य चश्मदीद गवाह जोगिंदर जिंदा है या उसकी मौत हो चुकी है। घायल गवाह जोगिंदर सिंह का मृत्यु प्रमाणपत्र उपलब्ध नहीं हो सका। पुलिस ने बताया कि जोगिंदर को ढूंढने की काफी कोशिश की गई। उसकी पत्नी सुनीता ने कहा कि वह पिछले 12-13 सालों से अलग रह रही हैं और उसे पति के जीवित होने या मौत की जानकारी नहीं है। उसके पैतृक गांव जींद में भी कोई ठोस जानकारी नहीं मिल पाई। दूसरे चश्मदीद गवाह परविंदर की सुनवाई के दौरान मौत हो गई। पुलिस ने 19 जनवरी को परविंदर की मौत की रिपोर्ट दर्ज होने के बाद उसका नाम गवाहों की सूची से हटा दिया। इन परिस्थितियों में अदालत ने अभियोजन पक्ष के साक्ष्यों को खारिज कर दिया।

दो गवाह मुकर गए
होटल मैनेजर चंदन और करिंदा विपिन ने अदालत में धर्मिंदर को पहचानने से इनकार कर दिया। पुलिस ने मामले में CCTV फुटेज भी जब्त नहीं किया।

जांच में खामियां
घटना वाले दिन का CCTV फुटेज जब्त नहीं किया गया। कथित वॉइस मैसेज के लिए आवाज़ के नमूने लिए गए, लेकिन फॉरेंसिक लैब को नहीं भेजे गए। मोहाली सेक्टर-80 के होटल रजिस्टर में धर्मिंदर के हस्ताक्षर और आधार कार्ड की एंट्री थी। हैंडराइटिंग रिपोर्ट पॉज़िटिव आई, लेकिन रजिस्टर पुलिस रिकॉर्ड से गायब हो गया। बचाव पक्ष के वकील अमित खैरवाल के अनुसार, शिकायतकर्ता और मृतक के भाई प्रवीण शाह ने केवल तीन आरोपियों  राजन, मनजीत और शुभम की पहचान की। बाकी आरोपियों के खिलाफ पुलिस कोई ठोस साक्ष्य पेश नहीं कर सकी।

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