Edited By Rohini Oberoi,Updated: 17 Feb, 2026 03:53 PM

हर साल समय पर प्रीमियम भरा ताकि मुसीबत में मां का इलाज करा सकूं लेकिन जब जरूरत पड़ी तो कंपनी ने हाथ खड़े कर दिए। यह दर्द उस बेटे का है जिसका वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (ट्विटर) पर तेजी से वायरल हो रहा है। यह घटना उन लाखों लोगों के लिए एक...
नेशनल डेस्क। हर साल समय पर प्रीमियम भरा ताकि मुसीबत में मां का इलाज करा सकूं लेकिन जब जरूरत पड़ी तो कंपनी ने हाथ खड़े कर दिए। यह दर्द उस बेटे का है जिसका वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (ट्विटर) पर तेजी से वायरल हो रहा है। यह घटना उन लाखों लोगों के लिए एक चेतावनी है जो भारी-भरकम प्रीमियम भरकर खुद को सुरक्षित महसूस करते हैं।
एजेंट का शर्मनाक जवाब: हमसे पूछकर पॉलिसी ली थी क्या?
वायरल वीडियो के मुताबिक शख्स अपनी मां के स्वास्थ्य बीमा (Health Insurance) के लिए हर साल 50,000 रुपये का प्रीमियम भरता था। हाल ही में जब उसकी मां गंभीर रूप से बीमार हुईं तो वह क्लेम (Claim) के लिए बीमा कंपनी के दफ्तर पहुंचा। आरोप है कि वहां उसे घंटों इंतजार कराया गया और अंत में उसका क्लेम खारिज (Reject) कर दिया गया। हद तो तब हो गई जब वहां मौजूद एक एजेंट ने कथित तौर पर कहा, हमसे पूछकर पॉलिसी थोड़ी ली थी।
सोशल मीडिया पर फूटा जनता का गुस्सा
इस वीडियो ने इंटरनेट पर एक बड़ी बहस छेड़ दी है। लोग बीमा कंपनियों की कार्यप्रणाली और उनकी पारदर्शिता पर सवाल उठा रहे हैं:
पैसा जमा करना ही मकसद: एक यूजर ने लिखा, "बीमा कंपनियों का काम सिर्फ पैसा बटोरना है मदद के वक्त वे गायब हो जाती हैं।"
प्रीमियम का डर: एक अन्य व्यक्ति ने चिंता जताते हुए कहा कि वह 8 साल से ₹80,000 प्रीमियम भर रहा है लेकिन आज उसे डर लग रहा है कि क्या जरूरत पड़ने पर उसे भी इसी अपमान का सामना करना पड़ेगा?
अधिकारियों से गुहार: कई लोगों ने भारत सरकार और बीमा नियामक (IRDAI) को टैग करते हुए सख्त कार्रवाई की मांग की है।
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सुरक्षा या सिर्फ कागजी वादा?
यह घटना इस कड़वी सच्चाई को उजागर करती है कि क्या हेल्थ इंश्योरेंस वाकई मुसीबत का साथी है या सिर्फ एक कागजी जाल। अक्सर कंपनियां नियम और शर्तों की आड़ में क्लेम देने से बचती हैं जिससे आम आदमी का भरोसा इस पूरे सिस्टम से उठने लगा है।
बीमा क्लेम करते समय रखें इन 3 बातों का ध्यान:
पॉलिसी के एक्सक्लूजन (Exclusions) पढ़ें: जानें कि कौन सी बीमारियां कवर नहीं हैं।
वेटिंग पीरियड: पुरानी बीमारियों के लिए वेटिंग पीरियड की जानकारी जरूर लें।
डॉक्यूमेंटेशन: अस्पताल में भर्ती होते ही कंपनी को सूचित करें और सभी बिल संभाल कर रखें।