Edited By Mehak,Updated: 24 Mar, 2026 12:37 PM

गरुड़ पुराण में जीवन, मृत्यु और आत्मा की यात्रा का विस्तार से वर्णन किया गया है। इसमें बताया गया है कि मृत्यु अचानक नहीं आती, बल्कि उसके पहले कुछ संकेत मिलने लगते हैं। इनमें सांसों में बदलाव, अजीब सपने, हथेली की रेखाओं का धुंधला होना, परछाई का साफ न...
नेशनल डेस्क : हिंदू परंपरा में गरुड़ पुराण को एक महत्वपूर्ण धार्मिक ग्रंथ माना जाता है। इसमें जीवन, मृत्यु, आत्मा की यात्रा, कर्म और उनके परिणामों के बारे में विस्तार से वर्णन किया गया है। मान्यता है कि मनुष्य को अपने कर्मों का फल केवल इस जीवन में ही नहीं, बल्कि मृत्यु के बाद भी भोगना पड़ता है। इसी कारण से मृत्यु के बाद इस ग्रंथ का पाठ कराया जाता है, ताकि आत्मा को शांति मिले और उसे सही मार्ग प्राप्त हो सके।
मृत्यु से पहले मिलने वाले संकेत
गरुड़ पुराण में यह भी बताया गया है कि मृत्यु अचानक नहीं आती, बल्कि उसके पहले कुछ संकेत मिलने लगते हैं। हालांकि, लोग अक्सर इन्हें सामान्य समझकर नजरअंदाज कर देते हैं।
सांसों में बदलाव
जब जीवन का अंतिम समय करीब होता है, तो व्यक्ति की सांसों में बदलाव देखा जा सकता है। सांस कभी तेज और कभी धीमी हो सकती है। कई बार व्यक्ति का ध्यान भी आसपास से हटकर कहीं और केंद्रित हो जाता है।
सपनों का बदलना
ऐसा माना जाता है कि मृत्यु से पहले व्यक्ति को अजीब और प्रतीकात्मक सपने दिखाई दे सकते हैं, जैसे अंधेरा या बुझा हुआ दीपक। इन्हें जीवन की ऊर्जा कम होने का संकेत माना जाता है।
शरीर से जुड़े संकेत
कुछ मान्यताओं के अनुसार, व्यक्ति को अपनी हथेली की रेखाएं हल्की या धुंधली दिखाई देने लगती हैं। साथ ही, अपनी परछाई साफ न दिखना और अपनी नाक स्पष्ट न दिखना भी मृत्यु के निकट होने के संकेत माने जाते हैं।
अदृश्य अनुभव
कहा जाता है कि अंतिम समय के करीब व्यक्ति को किसी अदृश्य शक्ति या पूर्वजों की उपस्थिति का आभास हो सकता है। इसे आत्मा के अगले सफर की तैयारी के रूप में देखा जाता है।