ट्रंप टीम चीन पहुंचते ही ‘डिजिटल कैद’ में, सभी US अधिकारियों के मोबाइल-लैपटॉप जमा, होटल का Wi-Fi भी बंद

Edited By Updated: 14 May, 2026 11:18 AM

trump officials stripped of all tech devices for china visit and given burner ph

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चीन यात्रा के दौरान अधिकारियों को “डिजिटल लॉकडाउन” में रखा जाता है। निजी मोबाइल और लैपटॉप छीनकर सीमित फीचर्स वाले सुरक्षित उपकरण दिए जाते हैं, क्योंकि अमेरिका चीन को दुनिया के सबसे बड़े साइबर जासूसी खतरों में...

International Desk: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जब चीन यात्रा पर जाते हैं, तो उनके साथ जाने वाले अधिकारियों की पूरी डिजिटल जिंदगी बदल जाती है। आम दिनों में स्मार्टफोन, लैपटॉप और क्लाउड सेवाओं पर निर्भर रहने वाले अधिकारी चीन पहुंचने से पहले अपने निजी उपकरण पीछे छोड़ देते हैं। उनकी जगह उन्हें विशेष “क्लीन डिवाइस” दिए जाते हैं। इन उपकरणों में सीमित फीचर्स होते हैं और इनमें बेहद सख्त सुरक्षा प्रणाली लागू रहती है।

 

“डिजिटल लॉकडाउन” क्यों
अमेरिकी एजेंसियों का मानना है कि चीन दुनिया के सबसे आक्रामक साइबर निगरानी वाले देशों में शामिल है, इसलिए वहां हर डिजिटल गतिविधि को संभावित खतरे के रूप में देखा जाता है।इसी वजह से चीन यात्रा के दौरान अमेरिकी अधिकारियों को एक बेहद नियंत्रित डिजिटल माहौल में काम करना पड़ता है, जिसे “डिजिटल लॉकडाउन” कहा जा रहा है। इस दौरान अधिकारी अपने निजी फोन, लैपटॉप और टैबलेट का इस्तेमाल नहीं कर सकते। कई मामलों में उन्हें अस्थायी ईमेल खाते, सीमित इंटरनेट सुविधा और नियंत्रित संचार माध्यम दिए जाते हैं। क्लाउड डेटा, संपर्क सूची और सामान्य संदेश भेजने वाले अनुप्रयोगों तक पहुंच भी सीमित कर दी जाती है। कई अधिकारियों को दिनों तक अपने सामान्य डिजिटल सिस्टम से पूरी तरह दूर रहना पड़ता है।

 

चीन रवाना होने से पहले अमेरिकी अधिकारियों को साफ चेतावनी
रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी प्रशासन यह मानकर चलता है कि चीन में होटल का इंटरनेट नेटवर्क, सार्वजनिक वाई-फाई और यहां तक कि निजी उपकरण भी निगरानी के दायरे में हो सकते हैं। इसलिए संवेदनशील बातचीत के लिए विशेष सुरक्षित कक्षों का उपयोग किया जाता है, जिन्हें इलेक्ट्रॉनिक जासूसी से बचाने के लिए तैयार किया जाता है। सुरक्षा विशेषज्ञ बिल गेज, जो “सेफ हेवन सिक्योरिटी ग्रुप” से जुड़े हैं, का कहना है कि चीन रवाना होने से पहले अमेरिकी अधिकारियों को साफ चेतावनी दी जाती है कि वे जो भी कहेंगे, लिखेंगे या करेंगे, उसकी निगरानी संभव है।

 

हर डिजिटल और निजी बातचीत रिकॉर्ड होने का डर
पूर्व व्हाइट हाउस मुख्य सूचना अधिकारी Theresa Payton ने भी कहा कि अधिकारियों को यह मानकर चलना पड़ता है कि उनकी हर डिजिटल और निजी बातचीत रिकॉर्ड की जा सकती है। इसी खतरे को देखते हुए अमेरिकी अधिकारी विदेश यात्राओं के दौरान विशेष सुरक्षित कमरों का इस्तेमाल करते हैं। इन्हें “संवेदनशील गोपनीय सूचना सुविधा” कहा जाता है। ये ऐसे अत्यधिक सुरक्षित कमरे होते हैं जिन्हें इलेक्ट्रॉनिक निगरानी, हैकिंग और जासूसी से बचाने के लिए विशेष तकनीक से तैयार किया जाता है। इन कमरों को अक्सर होटल या किसी नियंत्रित परिसर के अंदर अस्थायी रूप से बनाया जाता है।  यहां केवल अत्यंत संवेदनशील और गोपनीय चर्चाएं की जाती हैं, ताकि किसी बाहरी एजेंसी या साइबर नेटवर्क के जरिए जानकारी लीक न हो सके। अमेरिकी एजेंसियों का मानना है कि चीन दुनिया की सबसे शक्तिशाली साइबर निगरानी प्रणालियों में से एक रखता है। इसी वजह से चीन यात्रा के दौरान अमेरिकी अधिकारियों को सीमित इंटरनेट, अस्थायी उपकरण और नियंत्रित संचार प्रणाली का उपयोग करना पड़ता है। 

 

Related Story

img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!