ब्रिटेन में चीन के ‘सीक्रेट जासूसी नेटवर्क’ का पर्दाफाश, UK ने चीनी राजदूत किया तलब

Edited By Updated: 11 May, 2026 07:29 PM

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ब्रिटेन ने चीन के राजदूत को तलब कर कड़ी आपत्ति जताई है, क्योंकि लंदन की अदालत ने दो लोगों को बीजिंग के लिए जासूसी करने का दोषी ठहराया। आरोप है कि ये लोग ब्रिटेन में रह रहे हांगकांग समर्थक लोकतंत्र कार्यकर्ताओं की निगरानी कर रहे थे।

London: ब्रिटेन और चीन के रिश्तों में एक बार फिर तनाव बढ़ गया है। लंदन की अदालत द्वारा दो लोगों को चीन के लिए जासूसी करने का दोषी ठहराए जाने के बाद ब्रिटेन ने चीन के राजदूत झेंग ज़ेगुआंग को तलब कर कड़ी नाराजगी जताई है। ब्रिटेन के विदेश मंत्रालय ने कहा कि देश के भीतर किसी विदेशी सरकार द्वारा डराने, निगरानी करने या नुकसान पहुंचाने की कोशिश ब्रिटेन की संप्रभुता का गंभीर उल्लंघन है और इसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। लंदन की सेंट्रल क्रिमिनल कोर्ट ने वाई ची-लेउंग और युएन चुंग-बियू नाम के दो लोगों को चीन की ओर से जासूसी करने का दोषी पाया।

 

दोनों पर आरोप था कि वे ब्रिटेन में रह रहे हांगकांग समर्थक लोकतंत्र कार्यकर्ताओं की निगरानी कर रहे थे और उनकी जानकारी बीजिंग तक पहुंचा रहे थे। वाई ची-लेउंग पहले ब्रिटेन के इमिग्रेशन विभाग में काम कर चुका था। जांच एजेंसियों के अनुसार उसने हीथ्रो एयरपोर्ट पर ब्रिटिश बॉर्डर फोर्स में नौकरी के दौरान सरकारी डेटाबेस का गलत इस्तेमाल किया और निजी जानकारियां जुटाईं। ब्रिटिश जांच एजेंसियों का कहना है कि दोनों आरोपी हांगकांग सरकार से जुड़े लोगों के संपर्क में थे। उन पर ब्रिटेन में शरण लिए हांगकांग लोकतंत्र समर्थकों की गतिविधियों पर नजर रखने का आरोप है। रिपोर्ट के मुताबिक मशहूर लोकतंत्र समर्थक नेता नाथन लॉ की भी कई वर्षों से निगरानी की जा रही थी।

 

 ब्रिटेन के विदेश मंत्रालय ने साफ कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए सरकार हर जरूरी कदम उठाएगी। मंत्रालय ने चीन को चेतावनी दी कि ब्रिटेन की धरती पर किसी भी तरह की विदेशी जासूसी स्वीकार नहीं की जाएगी। दूसरी तरफ चीन ने इन आरोपों को राजनीतिक साजिश करार दिया है। चीन के दूतावास ने कहा कि ब्रिटेन “एंटी-चाइना राजनीतिक खेल” बंद करे। चीनी राजदूत झेंग ज़ेगुआंग ने ब्रिटिश अधिकारियों से मुलाकात के दौरान अदालत के फैसले पर आपत्ति जताई और कहा कि चीन के खिलाफ माहौल बनाया जा रहा है। यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब अमेरिका, ब्रिटेन और कई पश्चिमी देश पहले से ही चीन पर साइबर जासूसी, राजनीतिक हस्तक्षेप और निगरानी गतिविधियों के आरोप लगाते रहे हैं।
 

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