Edited By Parveen Kumar,Updated: 08 Feb, 2026 06:18 PM

देश के सबसे बड़े मिल्क को- आपरेटिव अमूल के मेनेजिंग डायरेक्टर जयेन मेहता ने हाल ही में भारत और अमरीका के मध्य संपन्न हुई ट्रेड डील को देश के किसानों के हित्तों की रक्षा करने वाली डील बताया है। पंजाब केसरी के साथ विशेष बात चीत के दौरान मेहता ने कहा...
नेशनल डेस्क : देश के सबसे बड़े मिल्क को- आपरेटिव अमूल के मेनेजिंग डायरेक्टर जयेन मेहता ने हाल ही में भारत और अमरीका के मध्य संपन्न हुई ट्रेड डील को देश के किसानों के हित्तों की रक्षा करने वाली डील बताया है। पंजाब केसरी के साथ विशेष बात चीत के दौरान मेहता ने कहा कि इस डील के होने के बाद देश के दूध किसानों का ही कम से कम डेढ़ लाख करोड़ रूपए का नुकसान होने से बच गया है।
अमरीका के साथ ट्रेड डील के दौरान भारत द्वारा अपनाई गई रणनीति और कूटनीति की प्रशंसा करते हुए मेहता ने कहा कि इस तरह के व्यापर समझौतों में संयम की बहुत जरूरत होती है और जब इस तरह के समझौतों का राजनीतिक प्रभाव भी हो तो स्थिति और भी जटिल हो जाती है, लेकिन मुझे ख़ुशी है कि सरकार ने तमाम चीजों को समझदारी के साथ हेंडल किया और एक ऐसी डील फाइनल हो पाई जो देश के किसानों के हितों की रक्षा करती है। इस डील के साथ साथ उन्होंने देश के डायरी सेक्टर के भविष्य और सरकार द्वारा डायरी सेक्टर के विकास के लिए किए जा रहे कार्यों पर भी विस्तार के साथ चर्चा की। पेश है जयेन मेहता का पूरा इंटरव्यू
इस डील से देश के किसानों को क्या फायदा हो सकता है?
प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त को लाल किले से ही स्पष्ट कर दिया था कि अमरीका के साथ ट्रेड डील में देश के किसानों के हित्तों के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा और सरकार अपने स्टेण्ड पर कायम रही है और निश्चेत तौर पर इसका डायरी और फार्म सेक्टर के लिए यह एक ऐतिहासिक डील है। सरकार ने इस मामले में रेड लाइन तय की थी और यह बात अमरीका के साथ हुई ट्रेड डील के बाद यह बात स्पष्ट रूप से सामने आ गई है और यह देश के दूध से जुड़े किसानों और आम किसानों के लिए यह डील फायदेमंद साबित होगी
दूध से जुड़े किसानों के लिए यह डील कैसे फायदेमंद है?
दूध इस देश की सबसे बड़ी फसल है और डायरी उत्पादों को इस डील से पूरी तरह से बाहर रखा गया है । देश में सालाना 250 मिलियन मेट्रिक टन दूध का उत्पादन होता है, जिसकी कुल आर्थिक वैल्यू लगभग 14-15 लाख करोड़ रुपये है। यह आंकड़ा गेहूं, चावल और तिलहन के संयुक्त उत्पादन मूल्य से भी अधिक है। देश के करीब 8 से 10 करोड़ परिवारों की आजीविका सीधे तौर पर दूध उत्पादन से जुड़ी हुई है। उन्होंने कहा कि इस समझौते में डेयरी क्षेत्र को सुरक्षित रखकर सरकार ने वास्तव में करोड़ों ग्रामीण परिवारों की आय और उनके जीवन स्तर की रक्षा की है। यदि इस क्षेत्र को विदेशी प्रतिस्पर्धा के लिए असुरक्षित छोड़ दिया जाता, तो किसानों की आय में लगभग 1.5 लाख करोड़ रुपये (यानी करीब 10%) तक की भारी गिरावट आने का खतरा था, जिसे इस सूझबूझ भरी डील ने टाल दिया है।
सेब,ड्राई फ्रूट और कुछ अन्य अमरीकी उत्पादों को भारतीय बाजार में प्रवेश मिलने पर आपकी क्या राय है?
जिन फसलों को इस डील से बाहर रखा गया है उनमे भी अभी टेरिफ रेट के पूरी तरह से स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही कोई टिप्पणी की जा सकती है ,फ्री ट्रेड एग्रीमेंट में चीजें रातो रात स्पष्ट नहीं होती हैं लेकिन फिर भी जिन फसलों भारतीय बाजार में पहुँच देने की बात कही जा रही है उनमे भारत अमरीकी फसलों को मुकाबले देने में पूरी तरह से सक्षम है लिहाजा मोटे तौर पर यह डील किसानों के हित में है।
अमूल को इस डील से क्या फायदा होगा?
सहकारी मॉडल की ताकत का जिक्र करते हुए मेहता ने बताया कि अकेले अमूल के साथ ही 36 लाख किसान परिवार और गुजरात के 18,600 गांवों की दूध मंडियां जुड़ी हुई हैं। भारत सरकार ने व्यापारिक वार्ताओं के दौरान अमेरिका, यूरोप, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड जैसे दुनिया के सबसे बड़े दूध उत्पादक देशों और समूहों को भारतीय डेयरी बाजार तक खुली पहुंच देने से इनकार कर दिया। मेहता के अनुसार, 150 करोड़ की आबादी के साथ भारत दुनिया का सबसे बड़ा बाजार है और इसमें आत्मनिर्भर होना हमारी बड़ी उपलब्धि है। हालांकि, कुछ चुनिंदा कृषि उत्पादों जैसे सेब और अखरोट के लिए अमेरिका को सीमित बाजार पहुंच दी गई है, लेकिन डेयरी क्षेत्र में 'नो मीन्स नो' के सिद्धांत का सख्ती से पालन किया गया है।
ट्रेड डील भारत के डायरी टू वर्ल्ड बनने की दिशा में बड़ा कदम
वैश्विक स्तर पर भारत की स्थिति अब और भी मजबूत होने जा रही है। वर्तमान में दुनिया का एक-चौथाई दूध भारत में उत्पादित होता है और अगले 10 वर्षों में इसके बढ़कर एक-तिहाई होने का अनुमान है। जयंत मेहता ने इसे 'डेयरी टू द वर्ल्ड' बनने के सपने की दिशा में एक बड़ा कदम बताया। इस ट्रेड डील का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि अमेरिका ने भारतीय डेयरी उत्पादों पर लगने वाले आयात शुल्क को 50% से घटाकर 18% कर दिया है। इससे भारतीय उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों में प्रतिस्पर्धी बनने और निर्यात के नए अवसर तलाशने में मदद मिलेगी। इस प्रकार, सरकार ने न केवल घरेलू बाजार को सुरक्षित किया है, बल्कि वैश्विक स्तर पर व्यापार विस्तार के रास्ते भी खोल दिए हैं।
किसानों और को-ऑपरेटिव्स ने इस मामले में सरकार के सामने अपना क्या पक्ष रखा था
इस सफलता के पीछे सरकार का समावेशी दृष्टिकोण और निरंतर परामर्श प्रक्रिया रही है। पिछले आठ-दस महीनों के दौरान सरकार ने डेयरी उद्योग, किसान संगठनों, निर्यातकों और सहकारी संस्थाओं जैसे सभी हितधारकों के साथ गहन विचार-विमर्श किया। सरकार ने उद्योग के 'प्रेशर पॉइंट्स' को समझा और उन्हें व्यापार वार्ता के दौरान मजबूती से रखा। इसके अलावा, घरेलू मोर्चे पर भी सरकार ने डेयरी उत्पादों पर जीएसटी की दरों में भारी कटौती करके उद्योग को नई ऊर्जा दी है।
मक्खन और पनीर पर टैक्स 12 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत करना और टेट्रापैक दूध पर इसे शून्य करना ऐसे क्रांतिकारी कदम रहे हैं, जिनसे मांग में भारी उछाल आया है। इन्हीं सकारात्मक प्रयासों का नतीजा है कि अमूल ब्रांड का कारोबार इस साल 1 लाख करोड़ रुपये के ऐतिहासिक आंकड़े को छूने की ओर अग्रसर है। मेहता ने निष्कर्ष निकाला कि यह ट्रेड डील देश के दीर्घकालिक हितों की रक्षा करने वाली और किसानों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होगी