ये है वो 13 दर्दनाक विमान हादसे, जिन्होंने एविएशन की दुनिया में लाया बड़ा बदलाव

Edited By Updated: 28 Jan, 2026 04:04 PM

13 tragic plane crashes that brought major changes in the world of aviation

विमान हादसे भले ही बेहद भयावह और दुखद हों, लेकिन हर बड़ी दुर्घटना ने एविएशन सुरक्षा को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभाई है। ग्रैंड कैन्यन टक्कर से लेकर बोइंग 737 मैक्स हादसों तक, कुल 13 प्रमुख विमान दुर्घटनाओं ने तकनीक, नियमों और पायलट ट्रेनिंग में...

नेशनल डेस्क : महाराष्ट्र के बारामती में बुधवार सुबह हुए एक दर्दनाक विमान हादसे में NCP नेता और उपमुख्यमंत्री अजित पवार समेत पांच लोगों की मौत हो गई। इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया कि विमान हादसे क्यों होते हैं और उनसे एविएशन सुरक्षा को कैसे मजबूत किया गया है। विमान दुर्घटनाएं भले ही बेहद दुखद हों, लेकिन इतिहास गवाह है कि हर बड़ी त्रासदी के बाद उड़ान सुरक्षा को बेहतर बनाने के लिए अहम सुधार किए गए।

ग्रैंड कैन्यन हादसा: निगरानी सिस्टम की शुरुआत

30 जून 1956 को ग्रैंड कैन्यन के ऊपर दो यात्री विमान आपस में टकरा गए। उस समय जमीन से विमानों की निगरानी की तकनीक बेहद कमजोर थी। इस हादसे के बाद अमेरिका में फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन (FAA) की स्थापना हुई और रडार सिस्टम को आधुनिक बनाया गया। आज विमानों में टक्कर से बचाव के लिए TCAS सिस्टम लगा होता है।

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यूनाइटेड एयरलाइंस फ्लाइट 173: टीमवर्क का सबक

28 दिसंबर 1978 को एक विमान का ईंधन खत्म हो गया क्योंकि पायलट एक छोटी तकनीकी समस्या में उलझा रहा और क्रू की चेतावनी को नजरअंदाज करता रहा। इसके बाद कॉकपिट रिसोर्स मैनेजमेंट (CRM) शुरू किया गया, जिससे पायलट और क्रू मिलकर फैसले लेने लगे।

एयर कनाडा फ्लाइट 797: आग से सुरक्षा

1983 में विमान के टॉयलेट में लगी आग ने यात्रियों को बाहर निकलने का मौका नहीं दिया। इसके बाद विमानों में स्मोक डिटेक्टर, ऑटोमैटिक फायर सिस्टम और फर्श पर चमकने वाली मार्गदर्शक पट्टियां अनिवार्य की गईं।

डेल्टा एयरलाइंस फ्लाइट 191: मौसम का खतरा

1985 में लैंडिंग के दौरान अचानक हवा के तेज झोंके ने विमान को नीचे गिरा दिया। इसके बाद फॉरवर्ड-लुकिंग रडार लगाए गए, जो पायलट को पहले ही खतरनाक मौसम की चेतावनी देते हैं।

यूनाइटेड एयरलाइंस फ्लाइट 232: बैकअप सिस्टम की जरूरत

1989 में इंजन फेल होने से हाइड्रोलिक सिस्टम खराब हो गया। इस हादसे के बाद विमानों में अतिरिक्त बैकअप कंट्रोल सिस्टम जोड़े गए ताकि एक सिस्टम फेल होने पर भी विमान नियंत्रित रहे।

अलोहा एयरलाइंस फ्लाइट 243: पुराने विमानों की जांच

1988 में एक पुराने बोइंग 737 की छत उड़ गई। इसके बाद पुराने विमानों की गहन जांच के लिए विशेष कार्यक्रम शुरू किए गए।

यूएस एयरवेज फ्लाइट 427: डिजाइन में सुधार

1994 में रडर जाम होने से विमान पलट गया। इसके बाद हजारों विमानों में रडर सिस्टम बदले गए।

वैल्यूजेट फ्लाइट 592: कार्गो सुरक्षा

1996 में कार्गो होल्ड में आग लगने के बाद सामान रखने वाले हिस्सों में भी फायर सिस्टम और सख्त नियम लागू किए गए।

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TWA फ्लाइट 800: ईंधन टैंक सुरक्षा

1996 में ईंधन टैंक विस्फोट के बाद विमानों में नाइट्रोजन गैस सिस्टम विकसित किया गया, जिससे आग का खतरा कम हुआ।

स्विसएयर फ्लाइट 111: वायरिंग सुधार

1998 में शॉर्ट सर्किट से लगी आग के बाद विमान की वायरिंग को अग्निरोधी बनाया गया।

एयर फ्रांस 447: मैन्युअल ट्रेनिंग

2009 में ऑटोपायलट फेल होने से हादसा हुआ। इसके बाद पायलटों को मैन्युअल उड़ान की विशेष ट्रेनिंग दी जाने लगी।

मलेशिया एयरलाइंस 370: रियल-टाइम ट्रैकिंग

2014 में विमान के रहस्यमय गायब होने के बाद हर विमान के लिए रियल-टाइम ट्रैकिंग अनिवार्य की गई।

बोइंग 737 मैक्स हादसे: सॉफ्टवेयर सुधार

2018 में MCAS सॉफ्टवेयर की वजह से हुए हादसों के बाद सिस्टम बदला गया और पायलटों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया।

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