Edited By Rohini Oberoi,Updated: 17 Mar, 2026 12:41 PM

भारत में बच्चों को गोद लेने की व्यवस्था को मजबूत करने के लिए केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (CARA) ने एक बड़ा कदम उठाया है। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के अंतर्गत आने वाली इस संस्था ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को नए दिशा-निर्देश...
CARA Adoption New Guidelines : भारत में बच्चों को गोद लेने की व्यवस्था को मजबूत करने के लिए केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (CARA) ने एक बड़ा कदम उठाया है। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के अंतर्गत आने वाली इस संस्था ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इन नियमों का मुख्य उद्देश्य बच्चों के अधिकारों की रक्षा करना और गोद लेने की प्रक्रिया में होने वाली किसी भी गड़बड़ी को रोकना है।
बिना कानूनी प्रक्रिया नहीं मिलेगा बच्चा
CARA ने स्पष्ट किया है कि किसी भी बच्चे को गोद लेने के लिए 'कानूनी रूप से स्वतंत्र' (Legally Free) घोषित करने से पहले लंबी जांच अनिवार्य है। अगर कोई बच्चा लावारिस मिलता है तो सबसे पहले उसके असली माता-पिता की तलाश की जाएगी। पुनर्वास के सभी प्रयास विफल होने के बाद ही उसे गोद लेने की सूची में डाला जाएगा। यदि माता-पिता खुद बच्चा संस्था को सौंपते हैं तो उन्हें 2 महीने का पुनर्विचार समय दिया जाएगा ताकि वे अपने फैसले पर दोबारा सोच सकें।
डिजिटल तिजोरी में रहेंगे रिकॉर्ड
अक्सर देखा गया है कि गोद लेने वाली संस्थाएं बंद होने के बाद बच्चों के रिकॉर्ड गायब हो जाते हैं। इससे उन बच्चों को बड़ी होने पर अपने मूल परिवार को ढूंढने में दिक्कत होती है। अब CARA ने निर्देश दिया है कि बच्चों के सभी भौतिक (Physical) और डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रखे जाएं। किसी भी रिकॉर्ड को बिना अनुमति के नष्ट नहीं किया जा सकेगा। संस्था बंद होने की स्थिति में सारा डेटा सरकार द्वारा नामित एजेंसी को सौंपना होगा।
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सोशल मीडिया पर फोटो डाली तो खैर नहीं
नए नियमों में बच्चों की गोपनीयता (Privacy) को लेकर सबसे सख्त रुख अपनाया गया है। किसी भी अनाथालय या गोद लेने वाली एजेंसी में रहने वाले बच्चे की फोटो या वीडियो सोशल मीडिया पर साझा करना पूरी तरह प्रतिबंधित है। बच्चे की पहचान सार्वजनिक करने वाले अधिकारियों या संस्थानों के खिलाफ अब सीधे कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
पारदर्शिता और सुरक्षा पर जोर
इन निर्देशों का उद्देश्य 'किशोर न्याय अधिनियम 2015' को कड़ाई से लागू करना है। सरकार चाहती है कि गोद लेने की प्रक्रिया केवल कागजों पर ही नहीं बल्कि जमीन पर भी इतनी प्रभावी हो कि बच्चों की तस्करी या पहचान चोरी जैसी घटनाओं पर पूरी तरह लगाम लग सके।