ट्रंप की ईरान को सख्त चेतावनी: पागलों के हाथ में एटम बम नहीं दे सकते, 'पहला निशाना इजरायल, अगला अमेरिका होगा'

Edited By Updated: 02 May, 2026 11:39 AM

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US-Iran Nuclear: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। Donald Trump ने ईरान द्वारा भेजे गए नए प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया है। यह प्रस्ताव पाकिस्तान के जरिए अमेरिका तक पहुंचाया गया था।  रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रस्ताव पढ़ने के बाद...

US-Iran Nuclear: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। Donald Trump ने ईरान द्वारा भेजे गए नए प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया है। यह प्रस्ताव पाकिस्तान के जरिए अमेरिका तक पहुंचाया गया था। रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रस्ताव पढ़ने के बाद ट्रंप संतुष्ट नहीं दिखे और उन्होंने साफ कहा कि मौजूदा शर्तों पर कोई समझौता संभव नहीं है। उनका कहना है कि अगर ईरान बेहतर और स्पष्ट शर्तें नहीं रखता, तो बातचीत आगे नहीं बढ़ेगी।

क्या था Iran का प्रस्ताव?
Iran ने अमेरिका के सामने एक अहम शर्त रखी थी, अगर अमेरिका होर्मुज जलडमरूमध्य (Hormuz Strait) पर लगी नाकेबंदी हटाता है, तो वह परमाणु समझौते पर बातचीत के लिए तैयार है। लेकिन ट्रंप का रुख इससे बिल्कुल उल्टा है। वे चाहते हैं कि ईरान पहले परमाणु कार्यक्रम पर समझौता करे, उसके बाद ही किसी तरह की राहत दी जाएगी।

पागलों के हाथ में परमाणु हथियार नहीं रहने दे सकते
ट्रंप ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि ईरान को किसी भी कीमत पर परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दिया जाएगा। उन्होंने कहा, 'ईरान को परमाणु हथियार नहीं दे सकते हैं क्योंकि वे सबसे पहले इसका इस्तेमाल इजरायल पर करेगा, फिर मिडिल ईस्ट और यूरोप पर, और अगला नंबर अमेरिका होगा, हम ऐसे पागलों (Lunatics) के हाथ में परमाणु हथियार नहीं रहने दे सकते।'

Trump की कड़ी चेतावनी
ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी सैन्य कार्रवाई, खासकर B-2 बॉम्बर्स के इस्तेमाल से ईरान की सैन्य क्षमता कमजोर हो गई है। उनके अनुसार ईरान की नौसेना, वायुसेना और रडार सिस्टम पर गंभीर असर पड़ा है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि वे पूरी तरह विनाशकारी हमला नहीं करना चाहते, बल्कि कूटनीतिक समाधान को प्राथमिकता देते हैं।

Hormuz Strait बना वैश्विक संकट का कारण
इस पूरे तनाव की शुरुआत 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद हुई। इसके बाद Strait of Hormuz बंद होने से वैश्विक ऊर्जा बाजार में संकट खड़ा हो गया। यह स्ट्रेट दुनिया की लगभग 20% तेल और गैस सप्लाई का मुख्य रास्ता है। इसके बंद होने से कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गईं, जो पिछले 4 साल का उच्च स्तर है। इससे वैश्विक मंदी का खतरा भी बढ़ गया है। हालांकि ईरान के प्रस्ताव की खबर के बाद कीमतों में थोड़ी नरमी जरूर देखी गई है, लेकिन स्थिति अभी भी अस्थिर है।

खतरा अभी टला नहीं
फिलहाल दोनों देशों के बीच टकराव की स्थिति बनी हुई है। एक तरफ अमेरिका दबाव बढ़ा रहा है, वहीं ईरान भी जवाबी कार्रवाई के लिए तैयार है। अगर जल्द कोई समझौता नहीं हुआ, तो यह तनाव बड़े संघर्ष में बदल सकता है, जिसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और ऊर्जा बाजार पर पड़ेगा।

ईरान की प्रतिक्रिया
ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने कहा कि अगर अमेरिका अपनी 'धमकी भरी भाषा' बंद करता है, तो बातचीत संभव है। लेकिन साथ ही उन्होंने यह भी साफ किया कि ईरानी सेना हर स्थिति के लिए तैयार है।  रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान ने अपने एयर डिफेंस सिस्टम को सक्रिय कर दिया है और जवाबी कार्रवाई की तैयारी कर रहा है। उन्होंने तुर्की, सऊदी अरब, कतर, मिस्र और यूरोपीय नेताओं से संपर्क किया है। दूसरी ओर, यूरोपीय संघ भी Hormuz Strait को फिर से खोलने के प्रयासों में जुटा है।  वहीं अमेरिकी अधिकारी छोटे लेकिन तेज सैन्य हमले की संभावना पर विचार कर रहे हैं, जिसमें इजरायल भी शामिल हो सकता है।  

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