Edited By Anu Malhotra,Updated: 26 Oct, 2026 04:36 PM

खांसी-जुकाम या वायरल इंफेक्शन होने पर डॉक्टर की सलाह के बिना या तुरंत एंटीबायोटिक्स खाना आजकल आम बात हो गई है। ये दवाइयां बीमारी से तो राहत दिला देती हैं, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इनका हमारे पेट और गट हेल्थ पर क्या असर पड़ता है?
नई दिल्ली: खांसी-जुकाम या वायरल इंफेक्शन होने पर डॉक्टर की सलाह के बिना या तुरंत एंटीबायोटिक्स खाना आजकल आम बात हो गई है। ये दवाइयां बीमारी से तो राहत दिला देती हैं, लेकिन क्या आप जानते है कि इनका हमारे पेट और गट हेल्थ पर क्या असर पड़ता है?
बहुत कम लोग इस बात को जानते हैं कि एंटीबायोटिक्स का असर सिर्फ बीमारी फैलाने वाले बैक्टीरिया तक सीमित नहीं रहता, बल्कि ये आंतों (gut) में मौजूद गुड बैक्टीरिया को भी नुकसान पहुंचाती हैं। इससे पेट का नेचुरल बैलेंस बिगड़ जाता है और पाचन तंत्र कमजोर होने लगता है।
एंटीबायोटिक्स से गट हेल्थ पर क्यों पड़ता है असर?
हमारे पेट में लाखों 'गुड बैक्टीरिया' होते हैं जो खाना पचाने और इम्यूनिटी को मजबूत रखने में मदद करते हैं। जब हम एंटीबायोटिक्स लेते हैं, तो ये दवाइयां अच्छे और बुरे—दोनों तरह के बैक्टीरिया को खत्म कर देती हैं। इसी वजह से एंटीबायोटिक का कोर्स पूरा होने के बाद भी कई दिनों तक पेट से जुड़ी समस्याएं परेशान करती हैं।
पाचन तंत्र में दिख सकते हैं ये 5 बड़े बदलाव
गैस बनना: आंत के बैक्टीरिया भोजन को पचाने और फर्मेंटेशन में अहम भूमिका निभाते हैं। एंटीबायोटिक्स के कारण जब ये बैक्टीरिया प्रभावित होते हैं, तो पेट में बहुत ज्यादा गैस बनने लगती है और ब्लोटिंग महसूस होती है।
पेट साफ होने की आदत बदलना: इन दवाओं की वजह से आंतों की कार्यप्रणाली पर असर पड़ता है। कुछ लोगों को बार-बार वॉशरूम जाना पड़ सकता है, तो कुछ को कब्ज (constipation) की समस्या हो सकती है।
लूज मोशन (दस्त): एंटीबायोटिक लेने के बाद अचानक पेट खराब हो सकता है या दस्त की शिकायत हो सकती है। आंतों का माइक्रोबियल बैलेंस बिगड़ने के कारण ऐसा होता है।
बेचैनी: माइक्रोबायोम और आंतों की इम्यूनिटी का सीधा कनेक्शन होता है। इसमें बदलाव आने से पेट में मरोड़, ऐंठन या लगातार बेचैनी बनी रह सकती है।
पाचन समस्याएं: एंटीबायोटिक कोर्स खत्म होने के बाद भी गट माइक्रोबायोम को अपनी पुरानी स्थिति में लौटने में वक्त लगता है, जिससे कुछ लोगों में डाइजेशन से जुड़ी दिक्कतें लंबे समय तक बनी रहती हैं।
डिस्क्लेमर: यह जानकारी सामान्य जागरूकता के लिए है। स्वास्थ्य से जुड़ा कोई भी कदम उठाने से पहले अपने डॉक्टर या एक्सपर्ट से जरूर सलाह लें।