Edited By SHUKDEV PRASAD,Updated: 24 Mar, 2026 10:43 PM

दिल्ली के Karkardooma Court स्थित विशेष NIA अदालत ने कश्मीरी अलगाववादी नेता Asiya Andrabi को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। यह सजा देश के खिलाफ साजिश रचने और गैरकानूनी गतिविधियों में शामिल होने के मामले में दी गई है।
नेशनल डेस्क: दिल्ली के Karkardooma Court स्थित विशेष NIA अदालत ने कश्मीरी अलगाववादी नेता Asiya Andrabi को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। यह सजा देश के खिलाफ साजिश रचने और गैरकानूनी गतिविधियों में शामिल होने के मामले में दी गई है। कोर्ट ने उनकी दो सहयोगियों Sofi Fahmeeda और Nahida Nasreen को भी 30-30 साल की सजा सुनाई है।
अदालत का सख्त रुख, नहीं दिखा कोई पछतावा
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि दोषियों ने अपने कृत्यों पर कोई अफसोस नहीं जताया। बल्कि उन्होंने अपने कामों को सही ठहराते हुए भविष्य में भी ऐसे ही कदम उठाने की बात कही। जज ने टिप्पणी करते हुए कहा कि इस तरह की गतिविधियों के प्रति नरमी दिखाना देश की एकता और अखंडता के लिए खतरा बन सकता है।
बचाव पक्ष की दलीलें खारिज
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि आरोपी महिलाएं शिक्षित हैं और स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रही हैं, इसलिए नरमी बरती जाए। हालांकि अदालत ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया और कहा कि एक शिक्षित व्यक्ति अपने फैसलों के परिणामों को समझता है, इसलिए इस आधार पर राहत नहीं दी जा सकती।
हिंसा को बढ़ावा देने का आरोप
अदालत ने यह भी माना कि भले ही आरोपियों ने सीधे तौर पर हिंसा में भाग नहीं लिया, लेकिन उन्होंने आतंकियों का समर्थन कर हिंसा को बढ़ावा दिया। जांच एजेंसी के मुताबिक, National Investigation Agency ने इस पूरे मामले में मजबूत साक्ष्य पेश किए, जिसके आधार पर सजा सुनाई गई।
किन धाराओं में हुई सजा
अदालत ने आसिया अंद्राबी को गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) और भारतीय दंड संहिता (IPC) की कई धाराओं के तहत दोषी माना। इन धाराओं में देश के खिलाफ साजिश और युद्ध छेड़ने जैसी गंभीर धाराएं शामिल हैं, जिसके चलते उन्हें उम्रकैद की सजा दी गई।
2018 से हिरासत में थीं आरोपी
यह मामला लंबे समय से चल रहा था और तीनों आरोपी वर्ष 2018 से ही हिरासत में थीं। अब अदालत के इस फैसले को अलगाववादी गतिविधियों के खिलाफ एक कड़े कदम के रूप में देखा जा रहा है।
NIA कोर्ट का यह फैसला साफ संकेत देता है कि देश की संप्रभुता और अखंडता के खिलाफ काम करने वालों के प्रति कानून सख्त रुख अपनाएगा। यह निर्णय भविष्य में ऐसे मामलों के लिए एक मजबूत संदेश माना जा रहा है।