पश्चिम एशिया युद्ध का असर! प्लास्टिक इंडस्ट्री में 70% उत्पादन गिरावट, वर्करों की नौकरी पर संकट

Edited By Updated: 04 Apr, 2026 12:00 PM

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भुवनेश्वर से लगभग 205 किमी दूर बालासोर के गणेश्वरपुर इंडस्ट्रियल एस्टेट में प्लास्टिक और पॉलिमर से जुड़े उद्योगों की स्थिति काफी चिंताजनक हो गई है।

नेशनल डेस्क: भुवनेश्वर से लगभग 205 किमी दूर बालासोर के गणेश्वरपुर इंडस्ट्रियल एस्टेट में प्लास्टिक और पॉलिमर से जुड़े उद्योगों की स्थिति काफी चिंताजनक हो गई है। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के कारण कच्चे माल की आपूर्ति बाधित होने से इन फैक्ट्रियों में उत्पादन में भारी कमी आई है।

वर्करों पर असर, नौकरी और आमदनी दोनों प्रभावित
एक महीना पहले तो हमें बैठने और आराम करने का भी समय नहीं मिलता था। अब मशीनें ज़्यादातर बंद पड़ी हैं," रतन सिंह, जो बालासोर की एक प्लास्टिक यूनिट में कॉन्ट्रैक्ट वर्कर हैं, कहते हैं। गणेश्वरपुर में लगभग 1,500 वर्कर आम दिनों में काम करते थे, लेकिन अब उनकी संख्या घटकर 800 से भी कम रह गई है। कई वर्कर पिछले 15 दिनों से बेरोज़गार हैं। रविंद्र साहू, जो फैक्ट्री के पास चाय की दुकान चलाते हैं, कहते हैं, "अगर युद्ध एक हफ़्ता और चला, तो मेरे बच्चे भूखे मर जाएँगे।

फैक्ट्रियों की हालत, उत्पादन लाइनें ठप
जगदंबा पॉलीमर्स लिमिटेड जैसी बड़ी प्लास्टिक यूनिट में इंजेक्शन मोल्डिंग मशीनें बंद पड़ी हैं। अधूरे बाथ सेट, बच्चों के खिलौने और अन्य घरेलू उत्पाद फैक्ट्री में बिखरे पड़े हैं। राजेंद्र मंडल, जो फैक्ट्री में काम करते हैं, कहते हैं, "हमने कभी सोचा भी नहीं था कि हमारी फैक्ट्री को ऐसी स्थिति का सामना करना पड़ेगा।" फैक्ट्री मैनेजर और प्रोडक्शन इंचार्ज कार्तिक चंद्र कर बताते हैं कि उत्पादन में लगभग 70 प्रतिशत की कमी आई है। "एक ही शेड के 10 प्रोडक्शन लाइन में से केवल दो ही चल रही हैं। कच्चे माल की कीमत बढ़ने के कारण मशीनों को फिर से कैलिब्रेट किया जा रहा है।"

कच्चे माल की कमी और आयात पर निर्भरता
भारत में पेट्रोकेमिकल उत्पादन की घरेलू क्षमता काफी है, लेकिन पॉलीमर की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए देश को बड़े पैमाने पर कच्चे तेल का आयात करना पड़ता है। इस वजह से युद्ध और वैश्विक संकटों का असर सीधे प्लास्टिक उद्योग पर पड़ रहा है।

अनिश्चितता से वर्करों में भय और चिंता
कॉन्ट्रैक्ट वर्करों के लिए यह अनिश्चितता सबसे डरावनी है। उत्पादन में कमी सीधे उनकी आमदनी पर असर डाल रही है और भविष्य की सुरक्षा भी खतरे में है।

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