इजराइल का ईरान को एक और बड़ा झटका, एयरस्ट्राइक में बसीज फोर्स प्रमुख सुलेमानी भी किया ढेर

Edited By Updated: 17 Mar, 2026 03:47 PM

the latest israel says it has killed the chief of iran s basij force

इजराइल ने दावा किया है कि उसने ईरान के बसीज फोर्स प्रमुख जनरल गुलाम रज़ा सुलेमानी को मार गिराया। इस बीच मध्य-पूर्व में जंग और तेज हो गई है-ड्रोन हमले, तेल संकट, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ पर तनाव और कई देशों की सैन्य सक्रियता से हालात बेहद खतरनाक बन चुके...

International Desk: मिडिल ईस्ट में चल रही जंग अब निर्णायक और खतरनाक मोड़ पर पहुंच गई है। इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते टकराव ने पूरे खाड़ी क्षेत्र को अस्थिर कर दिया है। इसी बीच इजराइल ने बड़ा दावा करते हुए कहा है कि उसने ईरान की आंतरिक सुरक्षा की सबसे अहम ताकत को करारा झटका दिया है। इजराइल ने दावा किया है कि उसने ईरान की बसीज फोर्स के प्रमुख  गुलाम रज़ा सुलेमानी (Gholam Reza Soleimani)  को एक एयरस्ट्राइक में मार गिराया है।

 

 बसीज फोर्स क्यों है अहम?
बसीज फोर्स ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) की अहम शाखा है, जिसका इस्तेमाल देश के अंदर विरोध प्रदर्शनों को दबाने के लिए किया जाता है।रिपोर्ट्स के अनुसार, हाल के विरोध प्रदर्शनों में बसीज ने  कड़ी हिंसा का इस्तेमाल किया, बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियां की, नागरिकों के खिलाफ बल प्रयोग किया। यूरोपीय यूनियन और अमेरिका पहले ही इस फोर्स पर मानवाधिकार उल्लंघन के आरोप लगा चुके हैं।

 

💥The #Israel Defense Forces (IDF) destroyed a drone storage facility in western #Iran, the army’s press service reported.

According to the statement, an Israeli Air Force combat aircraft, guided by real-time intelligence, struck a UAV storage site located within a launch… pic.twitter.com/BBmQDMyLUS

— The Caspian Post (@thecaspianpost) March 15, 2026

इजरायली सेना ने यह भी दावा किया है कि उसने तेहरान के मेहराबाद एयरपोर्ट पर ईरान के टॉप नेताओं के इस्तेमाल वाले विमान को नष्ट कर दिया। इस हमले का मकसद सिर्फ सैन्य क्षति नहीं, बल्कि ईरान की कम्युनिकेशन और क्षेत्रीय नेटवर्क को कमजोर करना बताया जा रहा है। इजरायल का कहना है कि यह हमला सिर्फ एक विमान को नष्ट करने तक सीमित नहीं था, बल्कि इसके पीछे बड़ी रणनीति थी:

  •  कम्युनिकेशन तोड़ना: ईरान के शीर्ष नेताओं और उनके सहयोगियों के बीच संपर्क कमजोर करना
  •  सैन्य तैयारी धीमी करना: तेज निर्णय और मूवमेंट की क्षमता को कम करना
  •  रीजनल नेटवर्क पर असर: ईरान के सहयोगी समूहों के साथ तालमेल बिगाड़ना
  •  रिकवरी क्षमता घटाना: हमले के बाद नुकसान की भरपाई करने की क्षमता सीमित करना

 

 

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