असम चुनाव से पहले कांग्रेस को बड़ा झटका, सांसद प्रद्युत बोरदोलोई और प्रदेश उपाध्यक्ष ने दिया इस्तीफा

Edited By Updated: 17 Mar, 2026 11:48 PM

big blow to congress before assam elections

असम विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है। नौगांव सीट से दो बार के सांसद प्रद्युत बोरदोलोई और असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष नवज्योति तालुकदार ने मंगलवार (17 मार्च 2026) को पार्टी से इस्तीफा दे दिया

नेशनल डेस्कः असम विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है। नौगांव सीट से दो बार के सांसद प्रद्युत बोरदोलोई और असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष नवज्योति तालुकदार ने मंगलवार (17 मार्च 2026) को पार्टी से इस्तीफा दे दिया। यह इस्तीफा ऐसे समय में आया है जब असम में सभी राजनीतिक दल आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुटे हुए हैं।

पार्टी की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल

नवज्योति तालुकदार ने मल्लिकार्जुन खड़गे को लिखे अपने इस्तीफे में पार्टी की कार्यशैली और फैसलों पर सवाल उठाए। सूत्रों के अनुसार, प्रद्युत बोरदोलोई भी जल्द ही भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो सकते हैं, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।

असम में मजबूत नेता रहे हैं बोरदोलोई

प्रद्युत बोरदोलोई असम में कांग्रेस के प्रमुख चेहरों में गिने जाते रहे हैं।

उन्होंने राज्य में पार्टी संगठन को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई थी।

सांसद बनने के बाद बढ़ा कद

बोरदोलोई ने 2019 में नौगांव लोकसभा सीट से जीत दर्ज की, जिससे उनका राजनीतिक प्रभाव और बढ़ गया। जमीनी स्तर पर उनकी अच्छी पकड़ मानी जाती है, इसलिए उनका इस्तीफा कांग्रेस के लिए बड़ा नुकसान माना जा रहा है।

बीजेपी में जाने के संकेत

हालांकि बोरदोलोई ने अपने अगले कदम को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है, लेकिन संकेत मिल रहे हैं कि वह बीजेपी में शामिल हो सकते हैं। पिछले कुछ वर्षों में असम में कांग्रेस के खराब प्रदर्शन के कारण पार्टी के अंदर असंतोष बढ़ा है। खासकर 2021 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के केवल 29 सीटों पर सिमटने के बाद कई नेताओं ने पार्टी की रणनीति और नेतृत्व पर सवाल उठाए थे।

चुनावी समीकरण पर पड़ सकता है असर

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि अगर बोरदोलोई बीजेपी में शामिल होते हैं, तो नौगांव और आसपास के क्षेत्रों में चुनावी समीकरण बदल सकते हैं। कांग्रेस को अपने मजबूत नेता के बिना इस क्षेत्र में समर्थन बनाए रखना मुश्किल हो सकता है। कुल मिलाकर, असम चुनाव से पहले कांग्रेस को यह डबल झटका पार्टी के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।

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