Bihar Registry Rules Change: 1 अप्रैल 2026 से जमीन रजिस्ट्री नियमों में बदलाव, अब इन 13 चीजों के बीना नहीं होगी रजिस्ट्री…

Edited By Updated: 21 Feb, 2026 08:25 AM

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अगर आप बिहार में जमीन खरीदने या बेचने का मन बना रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए सबसे जरूरी है। अब राज्य में केवल पैसे और गवाहों से काम नहीं चलेगा। नीतीश सरकार ने जमीन विवादों और कोर्ट-कचहरी के चक्करों को जड़ से खत्म करने के लिए 1 अप्रैल 2026 से...

नेशनल डेस्क: अगर आप बिहार में जमीन खरीदने या बेचने का मन बना रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए सबसे जरूरी है। अब राज्य में केवल पैसे और गवाहों से काम नहीं चलेगा। नीतीश सरकार ने जमीन विवादों और कोर्ट-कचहरी के चक्करों को जड़ से खत्म करने के लिए 1 अप्रैल 2026 से रजिस्ट्री की प्रक्रिया में एक क्रांतिकारी बदलाव करने का फैसला किया है। अब धोखाधड़ी की गुंजाइश खत्म होगी और हर लेन-देन पूरी तरह पारदर्शी होगा।

यह बदलाव मुख्यमंत्री के 7 निश्चय-3 कार्यक्रम के तहत लागू होगा, जिसका उद्देश्य जमीन से जुड़े विवादों को कम करना और आम लोगों को सुरक्षित लेन-देन की सुविधा देना है।

रजिस्ट्री से पहले देनी होंगी 13 अहम जानकारियां
अब खरीदार और विक्रेता को ऑनलाइन पोर्टल पर निम्नलिखित जानकारियां स्पष्ट रूप से देनी होंगी:

क्रम अनिवार्य जानकारी (Mandatory Details) विवरण
1 निबंधन कार्यालय जहां रजिस्ट्री होनी है उस ऑफिस का नाम।
2 अंचल (Circle) जमीन किस ब्लॉक/अंचल के अंतर्गत आती है।
3 गांव का नाम मौजा या गांव की सटीक जानकारी।
4 थाना नंबर संबंधित क्षेत्र का थाना नंबर।
5 खाता संख्या जमीन के रिकॉर्ड की खाता संख्या।
6 खेसरा नंबर प्लॉट का यूनिक खेसरा नंबर।
7 कुल रकबा (Area) जमीन का सटीक माप/क्षेत्रफल।
8 चौहद्दी जमीन के चारों तरफ (उत्तर, दक्षिण, पूर्व, पश्चिम) किसका कब्जा है।
9 खतियान का विवरण पुराने रिकॉर्ड्स और खतियान की जानकारी।
10 खतियानी रैयत जमीन के मूल मालिक का नाम।
11 खरीदार का नाम जो व्यक्ति जमीन ले रहा है।
12 विक्रेता का नाम जो व्यक्ति जमीन बेच रहा है।
13 जमीन की किस्म क्या जमीन खेती (Agriculture) की है या रिहायशी (Residential)।

इन जानकारियों के बिना आवेदन आगे नहीं बढ़ेगा। सरकार का मानना है कि रजिस्ट्री के समय दी गई अधूरी जानकारी ही बाद में मुकदमों की बड़ी वजह बनती है।

SMS से होगी पुष्टि, 10 दिन में जांच पूरी

नई प्रणाली में खरीदार को रिकॉर्ड वेरिफिकेशन का विकल्प भी मिलेगा। अगर वह जांच का विकल्प चुनता है, तो आवेदन सीधे अंचल अधिकारी (CO) या संबंधित राजस्व अधिकारी के पास जाएगा।

  • अधिकारी 10 दिनों के भीतर जमीन के रिकॉर्ड की जांच करेंगे।
  • जांच रिपोर्ट SMS के जरिए आवेदक को भेजी जाएगी।
  • यदि तय समय में कोई आपत्ति दर्ज नहीं होती, तो आवेदन स्वतः रजिस्ट्री कार्यालय को अग्रेषित कर दिया जाएगा।
  • इससे प्रक्रिया तेज होगी और पारदर्शिता भी बढ़ेगी।

क्यों अहम है यह बदलाव?

अक्सर देखा गया है कि लोग बिना रिकॉर्ड जांचे जमीन खरीद लेते हैं और बाद में पता चलता है कि प्लॉट नंबर गलत है या विक्रेता असली मालिक नहीं है।

नई व्यवस्था से:

  • फर्जीवाड़े पर रोक लगेगी
  • ऑनलाइन रिकॉर्ड जांच अनिवार्य होगी
  • सरकारी दफ्तरों के चक्कर कम होंगे
  • खरीदार को पहले से पूरी जानकारी मिल सकेगी
  • विवाद-मुक्त रजिस्ट्री की ओर बड़ा कदम
     

राज्य सरकार का दावा है कि यह पहल जमीन रजिस्ट्री को सरल, सुरक्षित और विवाद-मुक्त बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी। अगर यह व्यवस्था प्रभावी ढंग से लागू होती है, तो जमीन से जुड़े मामलों में कोर्ट-कचहरी के झंझट में भी कमी आ सकती है।

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