Edited By Tanuja,Updated: 08 Apr, 2026 05:59 PM

ब्रिटेन में भारतीय मूल की एक स्वास्थ्यकर्मी ने ‘आंटी’ कहे जाने को लेकर उत्पीड़न का मामला जीत लिया। कोर्ट ने माना कि यह उम्र और लिंग आधारित अपमान था। NHS ट्रस्ट को मुआवजा देने का आदेश दिया गया, हालांकि अन्य भेदभाव के आरोप खारिज कर दिए गए।
London: ब्रिटेन में एक अहम मामले में भारतीय मूल की स्वास्थ्यकर्मी ने उत्पीड़न का केस जीत लिया है। यह मामला ‘आंटी’ कहे जाने को लेकर था, जिसे अदालत ने अपमानजनक और भेदभावपूर्ण माना। यह मामला National Health Service (NHS) से जुड़ा है, जहां 61 वर्षीय स्वास्थ्य सहायिका इल्डा एस्टेव्स काम करती थीं। उन्होंने आरोप लगाया था कि उनके सहकर्मी चार्ल्स ओप्पोंग उन्हें बार-बार ‘आंटी’ कहकर बुलाते थे, जबकि उन्होंने कई बार ऐसा न करने को कहा था।इस मामले की सुनवाई Watford Employment Tribunal में हुई। न्यायाधीश जॉर्ज एलियट ने अपने फैसले में कहा कि यह व्यवहार उम्र और लिंग के आधार पर उत्पीड़न (harassment) की श्रेणी में आता है।
अदालत ने माना कि भले ही घाना की संस्कृति में ‘आंटी’ शब्द सम्मान के रूप में इस्तेमाल होता है, लेकिन कार्यस्थल पर इसे बार-बार कहना और शिकायत के बावजूद जारी रखना एक अपमानजनक माहौल बनाता है। कोर्ट ने कहा कि यह “मजाक के तौर पर किया गया अनुचित प्रयास” था, लेकिन इसका असर शिकायतकर्ता के लिए असहज और अपमानजनक रहा। इसी आधार पर अदालत ने NHS ट्रस्ट को आदेश दिया कि वह एस्टेव्स को 1,425.15 पाउंड का मुआवजा दे, क्योंकि उनकी भावनाएं आहत हुईं।
एस्टेव्स ने यह भी बताया कि उनके सहकर्मी ने उनके एक वरिष्ठ सहयोगी के साथ रिश्तों को लेकर भी अनुचित टिप्पणियां की थीं, जिससे कार्यस्थल का माहौल और खराब हुआ। हालांकि, अदालत ने उनके अन्य आरोप जैसे जाति भेदभाव, प्रतिशोध और वेतन कटौती को पर्याप्त सबूत न होने के कारण खारिज कर दिया। अदालत ने यह भी साफ किया कि इस मामले में शिकायतकर्ता की पहचान छुपाने की मांग को इसलिए अस्वीकार किया गया क्योंकि सार्वजनिक न्याय प्रणाली में पारदर्शिता ज्यादा महत्वपूर्ण है।