जब डॉक्टर कहते हैं 'He is no more', जानें क्या दिल धड़कना बंद होने के बाद भी जागता है दिमाग? हुआ चौंकाने वाला खुलासा

Edited By Updated: 22 Feb, 2026 10:11 AM

can we still hear things after death new research reveals a shocking revelation

मौत हमेशा से वैज्ञानिकों और दार्शनिकों के लिए एक अनसुलझी पहेली रही है लेकिन हाल ही में आई एक नई रिसर्च ने इस विषय पर पूरी दुनिया को हैरान कर दिया है। न्यूयॉर्क के शोधकर्ताओं का दावा है कि जब किसी व्यक्ति का दिल धड़कना बंद कर देता है और उसे...

Life After Death Research : मौत हमेशा से वैज्ञानिकों और दार्शनिकों के लिए एक अनसुलझी पहेली रही है लेकिन हाल ही में आई एक नई रिसर्च ने इस विषय पर पूरी दुनिया को हैरान कर दिया है। न्यूयॉर्क के शोधकर्ताओं का दावा है कि जब किसी व्यक्ति का दिल धड़कना बंद कर देता है और उसे 'क्लिनिकली डेड' (मृत) घोषित कर दिया जाता है उसके कुछ समय बाद तक उसका दिमाग काम करता रहता है।

मौत की घोषणा सुन सकता है मरीज

जर्नल Resuscitation में प्रकाशित इस स्टडी के अनुसार मौत के पहले चरण के बाद भी इंसान की चेतना (Consciousness) पूरी तरह खत्म नहीं होती। शोध का नेतृत्व करने वाले डॉक्टर के मुताबिक कई मामलों में मरीजों ने अपने दिल की धड़कन रुकने के बाद भी आसपास हो रही हलचल को महसूस किया। सबसे डरावना और हैरान करने वाला दावा यह है कि कुछ मरीजों ने तो डॉक्टरों द्वारा अपनी मौत की घोषणा (Time of Death) तक को अपने कानों से सुना।

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कैसे काम करता है यह सिस्टम?

आमतौर पर डॉक्टर मौत का समय तब दर्ज करते हैं जब दिल धड़कना बंद कर देता है और मस्तिष्क तक रक्त का प्रवाह रुक जाता है। विज्ञान की भाषा में इसे 'डेथ' माना जाता है लेकिन रिसर्च कहती है:

सक्रिय चेतना: दिल रुकने के बाद भी मस्तिष्क की कोशिकाएं (Brain Cells) तुरंत नहीं मरतीं। इन्हें पूरी तरह खत्म होने में कई घंटे लग सकते हैं।

सुनने की शक्ति: रिसर्च में पाया गया कि 'हियरिंग' यानी सुनने की इंद्रिय सबसे अंत में काम करना बंद करती है। यानी व्यक्ति हिल-डुल नहीं सकता पर वह आसपास की बातें सुन सकता है।

अनुभवों की याद: जिन लोगों को कार्डियक अरेस्ट के बाद पुनर्जीवित (Resuscitate) किया गया उन्होंने बताया कि उन्हें याद था कि डॉक्टर उनके बारे में क्या बातें कर रहे थे।

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क्या बदल जाएगी मौत की परिभाषा?

इस शोध ने चिकित्सा जगत में एक नई बहस छेड़ दी है। अब तक जिसे हम अंतिम क्षण मानते थे वह शायद अंत नहीं बल्कि एक लंबी प्रक्रिया की शुरुआत है। डॉक्टर अब इस बात पर शोध कर रहे हैं कि क्या इन आखिरी पलों में दिमाग को मिलने वाले अनुभवों को सुखद बनाया जा सकता है।

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