Edited By Tanuja,Updated: 03 May, 2026 02:43 PM

कनाडा की खुफिया एजेंसी CSIS ने खालिस्तानी तत्वों को “हिंसक चरमपंथी खतरा” बताया है। रिपोर्ट में कहा गया कि कुछ समूह कनाडा से फंडिंग और हिंसा की योजना बनाते हैं। साथ ही चीन, रूस, ईरान और पाकिस्तान द्वारा विदेशी हस्तक्षेप को भी लोकतंत्र के लिए गंभीर...
International Desk: कनाडा की खुफिया एजेंसी Canadian Security Intelligence Service (CSIS) ने अपनी ताजा रिपोर्ट में खालिस्तानी तत्वों को “हिंसक चरमपंथी खतरा” बताया है। रिपोर्ट के अनुसार, कनाडा में मौजूद कुछ कट्टरपंथी समूह देश को आधार बनाकर फंडिंग जुटाने, प्रचार करने और हिंसा की योजना बनाने में लगे हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि “कनाडा-बेस्ड खालिस्तानी उग्रवादी” (CBKEs) की एक छोटी लेकिन सक्रिय संख्या लगातार ऐसी गतिविधियों में शामिल है। हालांकि पिछले साल कनाडा में कोई बड़ा हमला नहीं हुआ, लेकिन इनकी गतिविधियां राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बनी हुई हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, ये तत्व अक्सर सामुदायिक संस्थानों का इस्तेमाल फंड जुटाने के लिए करते हैं, जिसका उपयोग हिंसक गतिविधियों में किया जा सकता है। इससे कनाडा की सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं। CSIS ने विदेशी हस्तक्षेप को भी बड़ा खतरा बताया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन, रूस, ईरान और पाकिस्तान जैसे देश कनाडा की राजनीति और समाज को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं। चीन पर आरोप है कि वह फर्जी कंपनियों के जरिए नौकरी के विज्ञापन देकर संवेदनशील जानकारी रखने वाले लोगों को निशाना बनाता है। रूस पर सोशल मीडिया और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जरिए गलत जानकारी फैलाकर समाज में विभाजन पैदा करने का आरोप है। ईरान पर कनाडा में अपने विरोधियों को डराने, अगवा करने या नुकसान पहुंचाने की साजिश का आरोप लगाया गया है।
वहीं पाकिस्तान पर आरोप है कि वह मीडिया, राजनीति और सामाजिक संगठनों के जरिए प्रभाव डालकर अपनी बात को आगे बढ़ाता है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि मल्टीकल्चरल नीतियों के कारण कई बार वैध सांस्कृतिक गतिविधियों और चरमपंथी समर्थन के बीच की रेखा धुंधली हो जाती है, जिसका फायदा कट्टरपंथी तत्व उठाते हैं। CSIS ने सरकार को सख्त कदम उठाने की सलाह दी है, जिसमें विदेशी फंडिंग की कड़ी जांच, ट्रांसनेशनल अपराधों पर सख्त कार्रवाई और जनता के बीच पारदर्शिता बढ़ाना शामिल है।रिपोर्ट ने साफ चेतावनी दी है कि अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो कनाडा की सुरक्षा और लोकतंत्र को गंभीर नुकसान हो सकता है।