Edited By Tanuja,Updated: 03 May, 2026 03:53 PM

यूरोपीय संसद ने चीन के नए “एथनिक यूनिटी लॉ” की कड़ी निंदा की है। कहा गया कि यह कानून तिब्बती, उइगर और अन्य अल्पसंख्यकों की पहचान दबाएगा। यूरोप ने मानवाधिकार उल्लंघन पर चिंता जताते हुए चीन के खिलाफ सख्त कदम उठाने की चेतावनी दी है।
International Desk: यूरोपीय संसद ने चीन के नए “एथनिक यूनिटी और प्रोग्रेस” कानून की कड़ी आलोचना की है। संसद का कहना है कि यह कानून चीन में अल्पसंख्यक समुदायों की पहचान और अधिकारों को कमजोर करेगा। यह कानून चीन की संसद National People's Congress द्वारा 12 मार्च 2026 को पारित किया गया था। इसे आधिकारिक रूप से “Law on the Promotion of Ethnic Unity and Progress” कहा जाता है। यूरोपीय संसद के अनुसार, यह कानून तिब्बती, उइगर, मंगोलियाई, हुई और मंचू जैसे समुदायों पर सांस्कृतिक और भाषाई दबाव बढ़ाएगा। खासतौर पर इसमें मंदारिन भाषा के ज्यादा इस्तेमाल और वैचारिक एकरूपता पर जोर दिया गया है।
संसद ने कहा कि यह नया कानून 1984 के पुराने Regional Ethnic Autonomy Law से अलग है, जो सीमित रूप में ही सही, लेकिन क्षेत्रीय स्वायत्तता का ढांचा देता था। अब नई नीति को “समावेशन” के नाम पर जबरन आत्मसात (assimilation) की दिशा में कदम बताया जा रहा है। यूरोप ने यह भी चिंता जताई कि इस कानून के तहत चीन के बाहर रहने वाले लोगों पर भी कार्रवाई की जा सकती है, अगर वे “एथनिक यूनिटी” के खिलाफ माने जाते हैं। इसे “ट्रांसनेशनल रिप्रेशन” यानी सीमाओं के पार दमन बताया गया है। यूरोपीय संसद ने European Union से मांग की है कि वह चीन के खिलाफ अपने “ग्लोबल ह्यूमन राइट्स सैंक्शंस” का इस्तेमाल करे और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई करे।
इसके अलावा, संसद ने Dalai Lama के उत्तराधिकारी के चयन में चीन के हस्तक्षेप को पूरी तरह खारिज किया। संसद ने कहा कि यह धार्मिक मामला है और इसमें केवल तिब्बती परंपराओं का पालन होना चाहिए। संसद ने कई राजनीतिक कैदियों की रिहाई की भी मांग की, जिनमें Choktrul Dorje Ten Rinpoche, Palden Yeshi और 11वें पंचेन लामा शामिल हैं। साथ ही, संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय से इस नए कानून के प्रभाव पर विस्तृत रिपोर्ट जारी करने की भी अपील की गई है। यह पूरा मामला चीन और यूरोप के बीच पहले से तनावपूर्ण संबंधों को और बिगाड़ सकता है, खासकर मानवाधिकार और लोकतांत्रिक मूल्यों को लेकर।