Edited By Mansa Devi,Updated: 11 Feb, 2026 03:13 PM

देश में कैंसर के मामले लगातार बढ़ रहे हैं और इसका असर हर उम्र के लोगों पर पड़ रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि शुरुआती लक्षण अक्सर हल्के और अस्पष्ट होते हैं, इसलिए लोग इन्हें नजरअंदाज कर देते हैं। इसके चलते बीमारी अक्सर एडवांस स्टेज में...
नेशनल डेस्क: देश में कैंसर के मामले लगातार बढ़ रहे हैं और इसका असर हर उम्र के लोगों पर पड़ रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि शुरुआती लक्षण अक्सर हल्के और अस्पष्ट होते हैं, इसलिए लोग इन्हें नजरअंदाज कर देते हैं। इसके चलते बीमारी अक्सर एडवांस स्टेज में पहुंचने तक पकड़ी नहीं जाती। खासकर पेट और सीने से जुड़े कैंसर शुरुआत में बिना किसी स्पष्ट संकेत के अंदर ही अंदर बढ़ते रहते हैं। हल्की सूजन, मामूली दर्द या लगातार थकान जैसी सामान्य बातें अक्सर एसिडिटी, तनाव या उम्र का असर समझ ली जाती हैं, जिससे समय पर इलाज नहीं हो पाता।
भारत में कैंसर का बढ़ता बोझ
साल 2024 के आंकड़ों के अनुसार, भारत में हर साल 15 लाख से अधिक नए कैंसर केस सामने आ रहे हैं। इस लिहाज से भारत दुनिया के टॉप तीन देशों में शामिल हो गया है। चिंता की बात यह है कि बड़ी संख्या में मरीजों की पहचान बीमारी के एडवांस स्टेज में होती है। युवा उम्र के लोग भी अब इस जानलेवा बीमारी की चपेट में आने लगे हैं। इसलिए शुरुआती पहचान और जागरूकता पहले से कहीं ज्यादा जरूरी हो गई है।
क्यों नजरअंदाज हो जाते हैं शुरुआती लक्षण
मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, वैशाली के मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. गोपाल शर्मा का कहना है कि कैंसर शुरुआत में कोई बड़ा या डराने वाला लक्षण नहीं दिखाता। उनके क्लीनिक में अक्सर ऐसे मरीज आते हैं, जो महीनों से कुछ लक्षण झेल रहे होते हैं, लेकिन उन्हें तनाव, उम्र या लाइफस्टाइल से जुड़ा मानकर टालते रहे। डॉक्टरों का कहना है कि इलाज में देरी बीमारी से ज्यादा नुकसान कर सकती है।
नॉर्मल समझकर लोग टाल देते हैं ये संकेत
लगातार थकान, बिना वजह वजन कम होना या भूख में बदलाव जैसे संकेत आम तौर पर लोग उम्र या काम का दबाव मान लेते हैं। लंबे समय तक बदहजमी, पेट फूलना या बाउल हैबिट्स में बदलाव को गलत खानपान का असर समझ लिया जाता है। लेकिन एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर कोई लक्षण दो से तीन हफ्ते से अधिक समय तक बना रहे और उसकी कोई साफ वजह न हो, तो डॉक्टर से तुरंत सलाह लेना जरूरी है।