Vande Mataram New Guidelines: राष्ट्र गीत वंदे मातरम् को लेकर सरकार की नई गाइडलाइंस- अब 6 अंतरा गाना जरूरी, समय भी किया तय

Edited By Updated: 11 Feb, 2026 02:15 PM

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भारत सरकार ने सरकारी कार्यक्रमों में 'वंदे मातरम्' को लेकर एक महत्वपूर्ण बदलाव किया है। अब आधिकारिक उत्सवों पर इस गीत के पूरे छह छंदों वाला संस्करण ही प्रस्तुत किया जाएगा। इस पूरे गायन या वादन के लिए 3 मिनट 10 सेकंड का समय तय किया गया है।

नेशनल डेस्क: देश के राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम्' को सम्मान देने और इसकी प्रस्तुति में समानता लाने के लिए केंद्र सरकार ने कड़े नियम लागू किए हैं। नए आदेश के अनुसार, अब सरकारी कार्यक्रमों में इस गीत का संक्षिप्त नहीं बल्कि 6 छंदों वाला पूरा संस्करण प्रस्तुत करना होगा। इस पूरी प्रक्रिया के लिए 3 मिनट और 10 सेकंड की अवधि निर्धारित की गई है। यह बदलाव राष्ट्रीय गीत की 150वीं वर्षगांठ के अवसर पर किया गया है, ताकि इसके गौरव को और बढ़ाया जा सके।

प्रोटोकॉल: राष्ट्रगान से पहले गूंजेगा 'वंदे मातरम्'
सरकार ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी आयोजन में राष्ट्रगान और राष्ट्रीय गीत दोनों होने हैं, तो कार्यक्रम की शुरुआत 'वंदे मातरम्' से होगी और उसके बाद 'जन गण मन' गाया जाएगा। जैसे ही राष्ट्रीय गीत शुरू होगा, वहां मौजूद सभी लोगों को सम्मान में 'सावधान' की मुद्रा में खड़ा होना होगा। हालांकि, फिल्मों या डॉक्यूमेंट्री के बीच में इसे बजाए जाने पर दर्शकों के खड़े होने की अनिवार्यता नहीं है, ताकि प्रसारण में कोई बाधा न आए।

ड्रम रोल से मिलेगी गीत शुरू होने की सूचना
आधिकारिक समारोहों में जब बैंड द्वारा यह गीत बजाया जाएगा, तो उससे ठीक पहले 'ड्रम रोल' (ढोल की विशेष थाप) दी जाएगी। यह 7 कदमों की चाल के बराबर समय का संकेत होगा, जिससे जनता को पता चल सके कि अब राष्ट्रीय गीत शुरू होने वाला है। राष्ट्रपति और राज्यपालों के आगमन, प्रस्थान, भाषणों और ध्वजारोहण जैसे महत्वपूर्ण अवसरों पर इन नियमों का पालन करना अब कानूनी रूप से जरूरी होगा।

तीन श्रेणियों में बांटे गए सरकारी कार्यक्रम
गृह मंत्रालय ने आयोजनों को उनकी महत्ता के आधार पर तीन हिस्सों में विभाजित किया है:

प्रथम श्रेणी: वे कार्यक्रम जहां केवल गीत की धुन बजाई जाएगी (जैसे राष्ट्रपति का संबोधन या राजकीय सम्मान)।

द्वितीय श्रेणी: जहां धुन के साथ सामूहिक गायन भी होगा (जैसे सांस्कृतिक उत्सव या परेड के अलावा अन्य समारोह)।

तृतीय श्रेणी: जहां स्वैच्छिक रूप से गायन किया जा सकता है (जैसे स्कूलों की सुबह की सभा)।

शिक्षण संस्थानों के लिए विशेष सलाह
मंत्रालय ने स्कूलों को सुझाव दिया है कि वे अपने दिन की शुरुआत 'वंदे मातरम्' के सामूहिक गायन से करें। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों के मन में राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति आदर और देशभक्ति की भावना को और गहरा करना है। अब तक राष्ट्रीय गीत के लिए कोई निश्चित समय सीमा या गायन का आधिकारिक तरीका तय नहीं था, लेकिन इस 10 पन्नों के आदेश ने अब सारी अस्पष्टता दूर कर दी है।

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