CBI की बड़ी कार्रवाई, रक्षा मंत्रालय का लेफ्टिनेंट कर्नल गिरफ्तार, करोड़ों रुपए बरामद

Edited By Updated: 21 Dec, 2025 12:15 AM

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CBI ने रिश्वतखोरी के एक बड़े मामले में रक्षा मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी को गिरफ्तार कर सनसनी मचा दी है। जांच एजेंसी ने 20 दिसंबर 2025 को लेफ्टिनेंट कर्नल दीपक कुमार शर्मा और एक निजी व्यक्ति विनोद कुमार को गिरफ्तार किया। CBI के मुताबिक, इस मामले...

नेशनल डेस्क: CBI ने रिश्वतखोरी के एक बड़े मामले में रक्षा मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी को गिरफ्तार कर सनसनी मचा दी है। जांच एजेंसी ने 20 दिसंबर 2025 को लेफ्टिनेंट कर्नल दीपक कुमार शर्मा और एक निजी व्यक्ति विनोद कुमार को गिरफ्तार किया। CBI के मुताबिक, इस मामले में 19 दिसंबर 2025 को पुख्ता सूचना के आधार पर केस दर्ज किया गया था।

आरोप है कि लेफ्टिनेंट कर्नल दीपक कुमार शर्मा, जो रक्षा उत्पादन विभाग में इंटरनेशनल कोऑपरेशन और एक्सपोर्ट से जुड़े अहम पद पर तैनात थे, लंबे समय से निजी रक्षा कंपनियों से रिश्वत ले रहे थे। बदले में वे इन कंपनियों को सरकारी विभागों से अवैध तरीके से लाभ पहुंचाने में मदद कर रहे थे।

दुबई बेस्ड कंपनी का भी नाम सामने आया

CBI की जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि इस पूरे मामले में एक दुबई स्थित डिफेंस कंपनी भी शामिल है। इस कंपनी के भारत में कामकाज को देखने वाले राजीव यादव और रवजीत सिंह बेंगलुरु से ऑपरेट कर रहे थे। आरोप है कि ये दोनों लगातार लेफ्टिनेंट कर्नल शर्मा के संपर्क में थे और उनके साथ मिलकर अपनी कंपनी के लिए सरकारी मंजूरी और अन्य फायदे हासिल करने की कोशिश कर रहे थे।

3 लाख रुपये की रिश्वत का आरोप

CBI के अनुसार, 18 दिसंबर 2025 को विनोद कुमार ने संबंधित कंपनी के निर्देश पर लेफ्टिनेंट कर्नल दीपक कुमार शर्मा को 3 लाख रुपये की रिश्वत दी थी। इसी लेन-देन को आधार बनाकर CBI ने जाल बिछाया और कार्रवाई को अंजाम दिया।

दिल्ली से जम्मू तक छापेमारी, नकदी बरामद

CBI ने मामले की जांच के तहत दिल्ली, श्रीगंगानगर, बेंगलुरु और जम्मू सहित कई स्थानों पर छापेमारी की। दिल्ली स्थित लेफ्टिनेंट कर्नल के आवास से 3 लाख रुपये की रिश्वत की रकम के अलावा करीब 2.23 लाख रुपये नकद बरामद किए गए। वहीं राजस्थान के श्रीगंगानगर स्थित उनके घर से 10 लाख रुपये कैश और कई अहम दस्तावेज जब्त किए गए हैं।

नई दिल्ली में स्थित उनके कार्यालय की तलाशी अभी जारी है। CBI ने दोनों आरोपियों को अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें 23 दिसंबर 2025 तक पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है। जांच एजेंसी का कहना है कि इस घोटाले में अन्य लोगों की भूमिका की भी गहन जांच की जा रही है।

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