Edited By Rohini Oberoi,Updated: 04 Aug, 2026 11:03 AM

गुजरात में Chandipura Virus का प्रकोप लगातार बढ़ता ही रहा है। इस खतरनाक संक्रामक बीमारी की चपेट में आने से अब तक 22 बच्चों की जान जा चुकी है जबकि 7 अन्य बच्चों का अस्पतालों में इलाज चल रहा है। राज्य में अब तक 184 संदिग्ध मामलों में से 35 में इंफेक्शन...
गांधीनगर : गुजरात में Chandipura Virus का प्रकोप लगातार बढ़ता ही रहा है। इस खतरनाक संक्रामक बीमारी की चपेट में आने से अब तक 22 बच्चों की जान जा चुकी है जबकि 7 अन्य बच्चों का अस्पतालों में इलाज चल रहा है। राज्य में अब तक 184 संदिग्ध मामलों में से 35 में इंफेक्शन की पुष्टि हो चुकी है।
वहीं प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग हाई अलर्ट मोड पर है और प्रभावित इलाकों में लगातार निगरानी रखी जा रही है। बता दें कि गांधीनगर, साबरकंठा (हिम्मतनगर), पाटन, राजकोट और भावनगर के अस्पतालों में संक्रमित बच्चों का इलाज जारी है। वहीं गुजरात के स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल पंशेरिया के अनुसार इस वायरस से पीड़ित सभी मरीज 15 वर्ष से कम आयु के हैं।
स्वास्थ्य मंत्रालय ने सैंडफ्लाई (बालू मक्खी) वाले इलाकों में सघन जांच के आदेश दिए हैं। लोगों को मिट्टी के घरों की दीवारों और फर्श की दरारें भरने की सलाह दी गई है क्योंकि यही कीड़ों के पनपने की मुख्य जगह होती हैं।दूसरी ओर सभी सरकारी व निजी बाल रोग अस्पतालों को निर्देश दिए गए हैं कि संदिग्ध लक्षण दिखने पर बच्चों को तुरंत भर्ती किया जाए ताकि समय पर इलाज से ऑर्गन फेलियर जैसी स्थिति को रोका जा सके।
जानें क्या है Chandipura Virus?
चांदीपुरा एक खतरनाक Zoonotic Virus है जो जानवरों या कीटों से इंसानों में फैलता है। यह मुख्य रूप से सैंडफ्लाई (बालू मक्खी) या छोटे कीड़ों के काटने से फैलता है। यह वायरस सीधे बच्चों के मस्तिष्क पर असर डालता है और उसमें सूजन पैदा कर देता है। इस बीमारी के लक्षण सामान्य फ्लू या बुखार से शुरू होकर खतरनाक रूप ले लेते हैं। तेज बुखार, अत्यधिक कमजोरी, थकान, सिरदर्द, शरीर और मांसपेशियों में दर्द तथा उल्टी आना। संक्रमण बढ़ने पर सांस फूलना, निमोनिया, दौरे पड़ना (Seizures), बेहोशी और ऑर्गन फेलियर होना।
ऐसे करें बचाव?
वर्तमान में चांदीपुरा वायरस का कोई सटीक इलाज, एंटीवायरल दवा या वैक्सीन उपलब्ध नहीं है। मरीजों को अस्पतालों में डॉक्टरों की देखरेख (Supportive Care) और न्यूरोलॉजिकल लक्षणों को कंट्रोल करके बचाने की कोशिश की जाती है। बच्चों को बाहर से आने के बाद अच्छी तरह हाथ-पैर धोने की आदत डालें। बच्चों को पूरी बांह के कपड़े पहनाएं और मच्छरों/मक्खियों से बचाएं। घर के आसपास कीड़ों या मक्खियों को नंगे हाथों से न मारें। घर और आसपास मिट्टी के गड्डों या दीवारों की दरारों को बंद रखें।