Edited By Mansa Devi,Updated: 21 Mar, 2026 05:07 PM

फोटो-वीडियो शेयरिंग प्लेटफॉर्म Instagram के यूजर्स के लिए एक बड़ा बदलाव आने वाला है। कंपनी Meta ने घोषणा की है कि 8 मई 2026 से प्लेटफॉर्म पर एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड चैट्स की सुविधा बंद कर दी जाएगी।
नेशनल डेस्क: फोटो-वीडियो शेयरिंग प्लेटफॉर्म Instagram के यूजर्स के लिए एक बड़ा बदलाव आने वाला है। कंपनी Meta ने घोषणा की है कि 8 मई 2026 से प्लेटफॉर्म पर एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड चैट्स की सुविधा बंद कर दी जाएगी। इस फैसले के बाद यूजर्स की निजी बातचीत पहले जैसी पूरी तरह सुरक्षित नहीं रहेगी।
क्या होता है एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन?
एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन एक ऐसा सुरक्षा सिस्टम है, जिसमें कोई भी मैसेज केवल भेजने वाला और पाने वाला ही पढ़ सकता है। यहां तक कि प्लेटफॉर्म चलाने वाली कंपनी भी इन मैसेज को एक्सेस नहीं कर सकती। यही वजह है कि इसे ऑनलाइन प्राइवेसी के लिए सबसे मजबूत सुरक्षा माना जाता है। इस फीचर के हटने के बाद यूजर्स के मैसेज पहले जितने प्राइवेट नहीं रहेंगे और जरूरत पड़ने पर कंपनी इन्हें एक्सेस कर सकेगी।
2023 में शुरू हुआ फीचर, अब क्यों हो रहा बंद?
इंस्टाग्राम ने यह एन्क्रिप्शन फीचर दिसंबर 2023 में लॉन्च किया था। यह Meta की उस योजना का हिस्सा था, जिसमें वह अपने प्लेटफॉर्म्स पर यूजर प्राइवेसी को मजबूत करना चाहती थी। हालांकि, कंपनी का कहना है कि बहुत कम यूजर्स इस फीचर का इस्तेमाल कर रहे थे। इसी कारण इसे बंद करने का फैसला लिया गया है, ताकि प्लेटफॉर्म को नए दिशा में विकसित किया जा सके।
यूजर्स पर क्या होगा असर?
8 मई 2026 के बाद इंस्टाग्राम पर भेजे जाने वाले सभी मैसेज एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड नहीं होंगे। इसका मतलब है कि कंपनी जरूरत पड़ने पर इन मैसेज को मॉडरेशन या अन्य कारणों से देख सकती है। जिन यूजर्स के पास पहले से एन्क्रिप्टेड चैट्स मौजूद हैं, उन्हें कंपनी की ओर से नोटिफिकेशन मिलेगा। साथ ही सलाह दी गई है कि जरूरी मैसेज और मीडिया को समय रहते डाउनलोड कर लें, ताकि डेटा सुरक्षित रखा जा सके।
प्राइवेसी बनाम सुरक्षा पर नई बहस
इस फैसले के बाद एक बार फिर प्राइवेसी और सुरक्षा को लेकर बहस शुरू हो गई है। कई विशेषज्ञों का मानना है कि एन्क्रिप्शन हटाने से यूजर्स की निजता को खतरा हो सकता है। कुछ सरकारें और सुरक्षा एजेंसियां मानती हैं कि एन्क्रिप्शन के कारण गलत गतिविधियों को ट्रैक करना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में Meta भविष्य में यूजर्स को WhatsApp जैसे प्लेटफॉर्म की ओर बढ़ाने की रणनीति अपना सकता है, जहां एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन पहले से डिफॉल्ट रूप में उपलब्ध है।