Chhattisgarh News: सरकारी खजाने में सेंधमारी करने वालों को AI ने पकड़ा, करोड़ों के गबन का पर्दाफाश

Edited By Updated: 01 Jul, 2026 03:45 PM

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छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की मदद से पुलिस विभाग में किए गए आडिट के दौरान कथित तौर पर वेतन में हेराफेरी कर करीब दो करोड़ रुपये के गबन होने की जानकारी सामने आई है  पुलिस अधिकारियों ने बुधवार को बताया कि पिछले लगभग तीन...

नेशनल डेस्क: छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की मदद से पुलिस विभाग में किए गए आडिट के दौरान कथित तौर पर वेतन में हेराफेरी कर करीब दो करोड़ रुपये के गबन होने की जानकारी सामने आई है  पुलिस अधिकारियों ने बुधवार को बताया कि पिछले लगभग तीन वर्षों के दौरान हुए इस घोटाले के मामले में विभाग के तीन कर्मचारियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। 

ऑडिट के दौरान वेतन शाखा में गड़बड़ियों का हुआ खुलासा 
अधिकारियों ने बताया कि आरोपियों की पहचान आरक्षक गिरीश राय, राजकुमार कतलम और हेमंत मैथ्यू के रूप में हुई है।  राय जगदलपुर में पुलिस अधीक्षक कार्यालय के वेतन शाखा में सहायक के तौर पर तैनात था, जबकि बाकी दो कर्मचारी कार्यालय की अलग-अलग शाखा में तैनात थे।  बस्तर के पुलिस अधीक्षक शलभ कुमार सिन्हा ने बताया कि कार्यालय में आंतरिक और बाह्य ऑडिट के दौरान वेतन शाखा में गड़बड़ियों का पता चला, जिसके बाद जांच शुरू की गई। 

आरोपियों ने कबूला जुर्म 
सिन्हा ने कहा, "जांच में पता चला कि गिरीश राय, जो कर्मचारियों का वेतन बनाने की प्रक्रिया में शामिल थे, ने वेतन रिकॉर्ड की सॉफ्ट कॉपी को प्रक्रिया से पहले संशोधित किया और धोखाधड़ी से अपना और दो अन्य आरक्षकों का वेतन बढ़ा दिया। पूछताछ के दौरान उन्होंने अपना अपराध कबूल कर लिया।  उन्होंने बताया कि जांच के नतीजों के आधार पर, सोमवार (29 जून) को जगदलपुर पुलिस थाना में तीनों आरक्षकों के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी, आपराधिक विश्वासघात और सरकारी धन के गबन से संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया।

अनुकंपा के आधार पर मिली नौकरी 
अधिकारी ने बताया कि तीनों को मंगलवार को स्थानीय अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। आरोप है कि उन्होंने अक्टूबर 2023 से मई 2026 के बीच सरकारी खातों से 1.5 करोड़ से दो करोड़ रुपये के बीच की रकम निकाली। राय, जो 2012 से पुलिस अधीक्षक कार्यालय में तैनात था और अनुकंपा के आधार पर नियुक्त हुआ था, को इस धोखाधड़ी का मास्टरमाइंड माना जा रहा है।

कर्मचारियों को लोन देने के बहाने उनका वेतन बढ़ाया
सिन्हा ने कहा कि जांच से यह भी पता चला है कि राय ने कुछ अन्य कर्मचारियों को लोन देने के बहाने उनका वेतन बढ़ाया और बाद में लोन की वापसी के तौर पर उनसे नकद रकम वापस ले ली। उन्होंने कहा कि पुलिस ने ऐसे लाभार्थियों की पहचान कर ली है और कथित साजिश में उनकी भूमिका का पता लगाने के लिए उनसे पूछताछ कर रही है। पुलिस अधिकारी ने बताया कि इस मामले की जांच की जा रही है।

वेतन बढ़ाकर थोड़ी-थोड़ी निकाली रकम 
पुलिस के एक अन्य अधिकारी ने बताया कि यह धोखाधड़ी अब तक इसलिए पकड़ में नहीं आ पाई क्योंकि पुलिस में वेतन पर होने वाला खर्च अक्सर बदलता रहता है और ऐसा नियमित तबादला, पोस्टिंग और कर्मचारियों की संख्या में बदलाव की वजह से होता है। इसके उलट, परियोजना आधारित कोष का नियमित वित्तीय ऑडिट होता है।      
 
वेतन खर्च में असामान्य बढ़ोतरी का पता चला
अधिकारी ने बताया कि आरोपी कथित तौर पर हर महीने अपने और कुछ अन्य लोगों के नाम पर वेतन बढ़ाकर थोड़ी-थोड़ी रकम निकालते थे और कई महीनों तक ये गड़बड़ियां पकड़ में नहीं आईं।  उन्होंने कहा कि आखिरकार कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) टूल्स की मदद से किए गए ऑडिट में वेतन खर्च में असामान्य बढ़ोतरी का पता चला, जिसके बाद जांचकर्ताओं ने वेतन खातों की बारीकी से जांच की। 

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