चीन की शर्मनाक हरकत! भारत की बेटी को बनाया बंधक, 18 घंटे तक रखा भूखा

Edited By Updated: 24 Nov, 2025 08:37 PM

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भारत और चीन के बीच अरुणाचल प्रदेश को लेकर दशकों पुराना सीमा विवाद एक बार फिर सुर्खियों में है। लेकिन इस बार मामला सिर्फ कूटनीतिक नहीं, बल्कि मानवीय संवेदनाओं को झकझोर देने वाला है। अरुणाचल प्रदेश की रहने वाली एक भारतीय महिला ने आरोप लगाया है कि चीन...

नेशनल डेस्क: भारत और चीन के बीच अरुणाचल प्रदेश को लेकर दशकों पुराना सीमा विवाद एक बार फिर सुर्खियों में है। लेकिन इस बार मामला सिर्फ कूटनीतिक नहीं, बल्कि मानवीय संवेदनाओं को झकझोर देने वाला है। अरुणाचल प्रदेश की रहने वाली एक भारतीय महिला ने आरोप लगाया है कि चीन के अधिकारियों ने उसका भारतीय पासपोर्ट अमान्य बताते हुए उसे शंघाई एयरपोर्ट पर 18 घंटे तक हिरासत में रखकर प्रताड़ित किया। यह घटना चौंकाने वाली है और दोनों देशों के संबंधों में एक नई चिंता खड़ी करती है।

आप भारतीय नहीं… अरुणाचल चीन है

पीड़िता पेमा वांग थोंगडोक, जो अरुणाचल प्रदेश की निवासी हैं, ने बताया कि 21 नवंबर 2025 को वह लंदन से जापान जा रही थीं। उड़ान के दौरान विमान को शंघाई एयरपोर्ट पर तीन घंटे का तकनीकी ठहराव करना पड़ा। इसी दौरान चीन के इमिग्रेशन अधिकारियों ने उनका पासपोर्ट जांचा और जन्मस्थान में Arunachal Pradesh देखकर दावा किया- “यह चीन का हिस्सा है… आपका पासपोर्ट मान्य नहीं है।” इसके बाद अधिकारियों ने उनका पासपोर्ट जब्त कर लिया और उन्हें आगे की उड़ान में बैठने से रोक दिया, जबकि उनके पास जापान का वैध वीज़ा मौजूद था।

सोशल मीडिया पर लगाई गुहार: PMO और रिजिजू को टैग किया

पेमा वांग थोंगडोक ने घटना को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साझा करते हुए प्रधानमंत्री कार्यालय, केंद्रीय मंत्री किरन रिजिजू और अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू को टैग किया। अपनी पोस्ट में उन्होंने लिखा- “चीन के इमिग्रेशन और चाइना ईस्टर्न एयरलाइंस ने मुझे 18 घंटे से अधिक समय तक रोके रखा। मेरे भारतीय पासपोर्ट को जन्मस्थान अरुणाचल बताकर अमान्य घोषित किया गया… मुझे आगे की यात्रा से रोक दिया गया।” उनकी इस पोस्ट ने भारत में रोष की लहर पैदा कर दी।

भूखे रखा, टॉर्चर किया… 18 घंटे का भयावह अनुभव

थोंगडोक के अनुसार, हिरासत में लिए जाने के बाद चीनी अधिकारियों ने उन्हें किसी भी तरह का खाना नहीं दिया। उन्होंने दावा किया- “मुझे 18 घंटे तक भूखा रखा गया, पूछताछ की गई और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया।” यह मामला सिर्फ पासपोर्ट विवाद नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय कानूनों और मानवीय अधिकारों के गंभीर उल्लंघन की ओर इशारा करता है।

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