Edited By Tanuja,Updated: 28 Feb, 2026 01:36 PM

मध्य पूर्व में अमेरिका-ईरान तनाव खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सख्त चेतावनी के बाद अमेरिका, ब्रिटेन, भारत समेत कई देशों ने दूतावास स्टाफ को हटाने और नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी की। तेल कीमतें बढ़ीं, अमेरिकी युद्धपोत...
International Desk: मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव फिर चरम पर है। इजरायल-अमेरिका के ईरान पर हमलों के बाद हालात बिगड़ने पर भारत ने इजरायल में रह रहे नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह दी है। कई देशों ने जंग के खतरे के चलते ईरान में अपने दूतावास खाली करने के आदेश जारी किए हैं। United Kingdom, China, ऑस्ट्रेलिया, पोलैंड, फिनलैंड, स्वीडन और सिंगापुर ने भी नागरिकों को सतर्क रहने या क्षेत्र छोड़ने की सलाह दी है। ब्रिटेन ने ईरान से अपने राजनयिक कर्मचारियों को अस्थायी रूप से वापस बुलाने की घोषणा की है। तेल अवीव में भारतीय दूतावासने शेल्टर के पास रहने और गैर-जरूरी यात्रा से बचने को कहा। इजरायल और ईरान ने एहतियातन हवाई क्षेत्र बंद कर दिए हैं।
गैर-आपातकालीन कर्मचारियों को देश छोड़ने की अनुमति
तनाव के बीच अमेरिका ने Jerusalem में अपने गैर-आपातकालीन कर्मचारियों को देश छोड़ने की अनुमति दी है। इससे पहले Beirut के लिए भी ऐसा आदेश जारी हुआ था। India, United Kingdom, China, ऑस्ट्रेलिया, पोलैंड, फिनलैंड, स्वीडन और सिंगापुर ने भी नागरिकों को सतर्क रहने या क्षेत्र छोड़ने की सलाह दी है। ब्रिटेन ने ईरान से अपने राजनयिक कर्मचारियों को अस्थायी रूप से वापस बुलाने की घोषणा की है।
अमेरिकी सैन्य जमावड़ा और इजरायल पर असर
कूटनीतिक बातचीत जारी रहने के बावजूद अमेरिका ने मध्य पूर्व में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा दी है। अमेरिकी विमानवाहक पोत USS Gerald R. Ford क्षेत्र में तैनात है और इजरायली जलक्षेत्र में मौजूद बताया जा रहा है। कई एयरलाइंस ने Tel Aviv के लिए उड़ानें निलंबित कर दी हैं। अमेरिकी दूतावास ने अपने कर्मचारियों को ओल्ड सिटी और वेस्ट बैंक जैसे क्षेत्रों की यात्रा से बचने की सलाह दी है। संभावित संघर्ष के डर से इजरायल की मुद्रा ‘शेकेल’ में भारी गिरावट दर्ज की गई है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर
ऊर्जा बाजारों में भी हलचल है। कच्चे तेल की कीमतें 3.2% बढ़कर 73 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गईं। लाल सागर में सुरक्षा खतरों के कारण प्रमुख शिपिंग कंपनियां A.P. Moller-Maersk और Hapag-Lloyd ने अपने जहाजों का मार्ग बदल दिया है। अब वे स्वेज नहर के बजाय अफ्रीका के दक्षिणी हिस्से से लंबा रास्ता अपना रही हैं। स्थिति अत्यंत संवेदनशील बनी हुई है। एक ओर कूटनीति के दरवाजे खुले हैं, दूसरी ओर सैन्य तैयारी तेज हो रही है। यदि वार्ता विफल होती है तो यह संघर्ष केवल क्षेत्रीय नहीं बल्कि वैश्विक आर्थिक और सुरक्षा संकट में बदल सकता है।