Edited By Pardeep,Updated: 31 Mar, 2026 10:37 PM

देश की सुरक्षा को मज़बूत करने के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए भारत सरकार ने 1 अप्रैल, 2026 से चीन में बने CCTV कैमरों की बिक्री पर पूरी तरह बैन लगाने का ऐलान किया है। केंद्र सरकार के इस फ़ैसले का असर अब बाज़ारों में साफ़ दिख रहा है।
नेशनल डेस्कः देश की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए भारत सरकार ने 1 अप्रैल, 2026 से चीन में बने CCTV कैमरों की बिक्री पर पूरी तरह बैन लगाने का ऐलान किया है। केंद्र सरकार के इस फैसले का असर अब बाजारों में साफ दिख रहा है।
इस बैन के पीछे मुख्य वजह नेशनल सिक्योरिटी और साइबर अटैक का खतरा है। इंटेलिजेंस एजेंसियों को शक है कि चीनी कैमरों के ऐप्स और सर्वर में कोई 'बैकडोर' हो सकता है, जिसके ज़रिए भारत का ज़रूरी डेटा चीन भेजा जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले साल हुए 500 से ज्यादा साइबर अटैक ऐसे ही कैमरों से जुड़े थे। साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट पवन दुग्गल के मुताबिक, नए सर्टिफिकेशन नियमों के लागू होने से Hikvision, TP-Link और Dahua जैसे बड़े चीनी ब्रांड अब भारत में नहीं बिक पाएंगे।
बाज़ार में उथल-पुथल: ग्राहक खुश, व्यापारी परेशान
एशिया के सबसे बड़े इलेक्ट्रॉनिक्स मार्केट, दिल्ली के लाजपत राय मार्केट में इस फैसले पर मिली-जुली प्रतिक्रिया है।
कस्टमर: खरीदार इस फैसले से खुश हैं और उनका कहना है कि इससे देश का पैसा देश में ही रहेगा और सिक्योरिटी बढ़ेगी। उनका ट्रेंड अब 'मेक इन इंडिया' प्रोडक्ट्स की तरफ बढ़ रहा है।
ट्रेडर्स: दूसरी तरफ, ट्रेडर्स को अपने बचे हुए चीनी सामान के स्टॉक की चिंता है। ट्रेडर्स का मानना है कि चूंकि अधिकतर सप्लाई चीन से आती है, इसलिए बैन के बाद मार्केट में कमी आ सकती है और कीमतें बढ़ सकती हैं।
पहले भी हो चुकी हैं 'टेक्निकल सर्जिकल स्ट्राइक'
भारत पहले भी कई बार चीनी टेक्नोलॉजी पर अपनी पकड़ मजबूत कर चुका है। साल 2020 में सरकारी प्रोजेक्ट्स में चीनी CCTV कैमरों पर बैन लगा दिया गया था और कई चीनी ऐप्स पर भी बैन लगा दिया गया था। सरकार की इस स्ट्रेटेजी का दूसरा बड़ा मकसद स्वदेशी मैन्युफैक्चरिंग, यानी मेक इन इंडिया ब्रांड्स को बढ़ावा देना है।