Edited By Mehak,Updated: 13 Feb, 2026 05:50 PM

गरुड़ पुराण में बताया गया है कि जो लोग अपने जीवनसाथी को धोखा देते हैं या विवाहेतर संबंध बनाते हैं, उन्हें मृत्यु के बाद भयंकर सजा मिलती है। ऐसे व्यक्तियों को तामिस्र, महातामिस्र, रौरव और कुंभीपाक नरक में यातनाएं सहनी पड़ती हैं। इसमें गर्म लोहे की...
नेशनल डेस्क : हिंदू धार्मिक ग्रंथों में गरुड़ पुराण का विशेष महत्व माना जाता है। यह ग्रंथ भगवान विष्णु और उनके वाहन गरुड़ के बीच हुए संवाद पर आधारित है। इसमें मानव जीवन, कर्म, मृत्यु के बाद आत्मा की यात्रा, पुनर्जन्म और मोक्ष जैसे विषयों का विस्तार से वर्णन मिलता है। गरुड़ पुराण में यह भी बताया गया है कि व्यक्ति के अच्छे और बुरे कर्मों का फल उसे अवश्य मिलता है। विशेष रूप से दांपत्य जीवन में विश्वासघात या अनैतिक संबंधों को गंभीर पाप माना गया है।
प्यार में धोखा देने वालों के लिए बताए गए नरक
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो लोग अपने जीवनसाथी को धोखा देते हैं या विवाह के बाहर संबंध बनाते हैं, उन्हें मृत्यु के बाद विभिन्न नरकों में दंड भुगतना पड़ता है।
1. तामिस्र और महातामिस्र नरक
ऐसे व्यक्तियों को तामिस्र और महातामिस्र नामक नरकों में भेजे जाने का वर्णन मिलता है।
- तामिस्र में आत्मा को अंधकार और कष्ट का सामना करना पड़ता है।
- महातामिस्र में भूख-प्यास और मानसिक पीड़ा का दंड बताया गया है।
इन नरकों का उद्देश्य व्यक्ति को उसके कर्मों के परिणाम का एहसास कराना है।
2. रौरव नरक
रौरव नरक को अत्यंत कष्टदायक बताया गया है। धार्मिक वर्णनों के अनुसार यहां अत्यधिक गर्मी और पीड़ा होती है, जिससे आत्मा तड़पती रहती है।
अन्य दंड का उल्लेख
गरुड़ पुराण में केवल नरक की यातनाओं का ही नहीं, बल्कि अगले जन्म में मिलने वाले परिणामों का भी उल्लेख है।
1. पशु योनि में जन्म
मान्यता है कि जो व्यक्ति अपने जीवनसाथी को छोड़कर अनैतिक संबंधों में पड़ता है, उसे अगले जन्म में पशु योनि प्राप्त हो सकती है। कुछ कथनों में यह भी कहा गया है कि ऐसे लोगों को कई जन्मों तक जीवनसाथी से वियोग सहना पड़ता है।
2. कठोर शारीरिक दंड
धार्मिक वर्णनों में लोहे की गर्म सलाख से दंड, कोड़े मारना और अन्य शारीरिक कष्टों का भी उल्लेख मिलता है। ये प्रतीकात्मक रूप से उस पीड़ा को दर्शाते हैं जो व्यक्ति ने अपने कर्मों से दूसरों को दी होती है।
3. कुंभीपाक नरक
ऐसे लोगों के लिए कुंभीपाक नरक का भी जिक्र मिलता है, जहां अत्यंत कठिन यातनाएं दी जाती हैं। कुछ मान्यताओं में कहा गया है कि अगले जन्म में उन्हें शारीरिक कष्ट या अपूर्ण जीवन मिल सकता है।
धार्मिक संदेश क्या है?
गरुड़ पुराण का मुख्य उद्देश्य डर पैदा करना नहीं, बल्कि व्यक्ति को सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा देना है। यह ग्रंथ सिखाता है कि
- दांपत्य जीवन में विश्वास और निष्ठा महत्वपूर्ण है।
- हर कर्म का फल अवश्य मिलता है।
- धर्म, सत्य और नैतिकता का पालन ही अंततः मोक्ष की ओर ले जाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इन वर्णनों को प्रतीकात्मक रूप में भी समझा जा सकता है, जो मनुष्य को नैतिक और जिम्मेदार जीवन जीने की सीख देते हैं।