Red, Blue या Pink...रंगों के नाम पर ही क्यों हैं दिल्ली मेट्रो की लाइनें? 99% लोग नहीं जानते इसके पीछे की असली वजह

Edited By Updated: 09 Feb, 2026 04:31 PM

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दिल्ली में रहने वाला शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति हो, जिसने कभी दिल्ली मेट्रो में सफर न किया हो। राजधानी में मेट्रो अब रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुकी है। दफ्तर जाने से लेकर घूमने-फिरने तक, लोग बड़ी संख्या में मेट्रो का इस्तेमाल करते हैं।

नेशनल डेस्क: दिल्ली में रहने वाला शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति हो, जिसने कभी दिल्ली मेट्रो में सफर न किया हो। राजधानी में मेट्रो अब रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुकी है। दफ्तर जाने से लेकर घूमने-फिरने तक, लोग बड़ी संख्या में मेट्रो का इस्तेमाल करते हैं। दिल्ली आने वाले पर्यटक भी शहर को देखने के लिए मेट्रो को सबसे तेज और सुविधाजनक साधन मानते हैं। यही वजह है कि दिल्ली मेट्रो में सफर करना एक आम लेकिन जरूरी अनुभव बन चुका है।

दिल्ली मेट्रो की खास पहचान उसकी अलग-अलग रंगों वाली लाइनें हैं। सफर के दौरान अक्सर लोग एक-दूसरे से पूछते नजर आते हैं कि ब्लू लाइन कहां से मिलेगी, येलो लाइन के लिए किस स्टेशन पर बदलना होगा या कोई खास स्टेशन किस लाइन पर आता है। दरअसल, हर लाइन को अलग रंग देने का मकसद यात्रियों को रास्ता पहचानने और इंटरचेंज करने में आसानी देना है। रंगों के जरिए यात्री बिना ज्यादा उलझन के सही दिशा में आगे बढ़ पाते हैं।

दिल्ली मेट्रो नेटवर्क में कुल नौ रंगों की लाइनें शामिल हैं। ब्लू, येलो, पिंक और रेड लाइन सबसे ज्यादा इस्तेमाल की जाने वाली लाइनें हैं, जिनके नाम लगभग सभी यात्रियों को याद रहते हैं। इसके अलावा ग्रीन, वायलेट, मैजेंटा, ग्रे और ऑरेंज लाइन भी मेट्रो नेटवर्क का अहम हिस्सा हैं। इन सभी लाइनों को अलग-अलग रंग देने से नक्शा समझना आसान हो जाता है और यात्रियों को यह तुरंत पता चल जाता है कि उन्हें किस दिशा में जाना है।

मेट्रो स्टेशनों पर भी रंगों के अनुसार फर्श पर निशान और संकेत बनाए गए हैं, जो यात्रियों को एक लाइन से दूसरी लाइन तक पहुंचने में मदद करते हैं। इन रंगीन संकेतों को फॉलो करते हुए यात्री बिना भटके आसानी से इंटरचेंज कर सकते हैं। यही वजह है कि दिल्ली मेट्रो का सफर न केवल तेज बल्कि सुरक्षित और व्यवस्थित भी माना जाता है।

जो लोग दिल्ली में रहते हैं या पहली बार शहर आते हैं, उनके लिए मेट्रो की यह रंग व्यवस्था काफी मददगार साबित होती है। रंगीन लाइनों और स्पष्ट संकेतों की वजह से यात्रियों को रास्ता खोजने में परेशानी नहीं होती। यही कारण है कि दिल्ली मेट्रो को आज न सिर्फ राजधानी, बल्कि पूरे देश में सार्वजनिक परिवहन की एक बेहतरीन और आदर्श व्यवस्था के रूप में देखा जाता है।

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