आसमान से गायब हुए बादल, देश में मानसून की रफ्तार पड़ी धीमी, 40% तक बारिश की कमी, कई राज्यों में सूखे जैसे हालात

Edited By Updated: 17 Jun, 2026 11:59 PM

clouds disappear from the sky monsoon slows down in the country

भारतीय कृषि की लाइफलाइन कहे जाने वाले दक्षिण-पश्चिम मानसून की चाल सुस्त पड़ने से देशभर में हाहाकार मच गया है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के ताजा आंकड़ों और सैटेलाइट तस्वीरों ने सरकार और किसानों की नींद उड़ा दी है। देश के मध्य और पश्चिमी हिस्सों के...

नई दिल्ली: भारतीय कृषि की लाइफलाइन कहे जाने वाले दक्षिण-पश्चिम मानसून की चाल सुस्त पड़ने से देशभर में हाहाकार मच गया है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के ताजा आंकड़ों और सैटेलाइट तस्वीरों ने सरकार और किसानों की नींद उड़ा दी है। देश के मध्य और पश्चिमी हिस्सों के ऊपर आसमान पूरी तरह साफ है, जिसका सीधा मतलब है कि मानसून की सक्रियता फिलहाल थम गई है। पूरे भारत में बारिश की कमी का आंकड़ा बढ़कर अब 40 प्रतिशत तक पहुंच गया है।


आसमान में बादलों का 'अकाल'
INSAT-3DS सैटेलाइट से 17 जून की सुबह ली गई तस्वीरों ने डरावनी तस्वीर पेश की है। महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश, राजस्थान और कर्नाटक जैसे राज्य लगभग बादल-विहीन दिखाई दे रहे हैं। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून की प्रगति पिछले एक हफ्ते से पूरी तरह रुकी हुई है क्योंकि अरब सागर से नमी का प्रवाह बेहद कमजोर पड़ गया है।

इन राज्यों में मानसून ने फेरा मुंह (बारिश की कमी):

  • गुजरात: 98% की भारी कमी (लगभग सूखा)
  • महाराष्ट्र: 79% की कमी
  • मेघालय: 85% की कमी
  • झारखंड: 66% की कमी
  • छत्तीसगढ़: 65% की कमी

इसके अलावा कर्नाटक, तेलंगाना, ओडिशा, बिहार और असम जैसे राज्यों में भी सामान्य से बहुत कम बारिश दर्ज की गई है।

खेती पर मंडराया 'महा-संकट'
जून का महीना किसानों के लिए सबसे महत्वपूर्ण होता है क्योंकि इसी दौरान धान (Paddy), सोयाबीन, कपास और दालों जैसी खरीफ फसलों की बुवाई जोर पकड़ती है। मानसून में इस देरी और बढ़ते सूखे के कारण बुवाई का शेड्यूल बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। अगर आने वाले दिनों में बारिश नहीं हुई, तो मिट्टी की नमी खत्म हो जाएगी, जिसका सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था और खाद्य आपूर्ति पर पड़ेगा।


कब बरसेगा 'अमृत'?
मौसम विभाग की मानें तो फिलहाल राहत की उम्मीद कम है। हालांकि, पूर्वानुमान मॉडल संकेत दे रहे हैं कि 21 जून के बाद नमी का प्रवाह फिर से मजबूत हो सकता है, जिससे मानसून को दोबारा गति मिल सकती है। जून का आधा महीना बीत चुका है और 40% की भारी कमी के बीच अब सबकी निगाहें आसमान की ओर टिकी हैं कि क्या मानसून इस नुकसान की भरपाई समय रहते कर पाएगा।

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