Edited By Mehak,Updated: 13 Feb, 2026 06:19 PM

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधानमंडल बजट सत्र के पहले दिन राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के अभिभाषण के दौरान हुए हंगामे पर समाजवादी पार्टी (सपा) की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि सपा के सदस्यों के आचरण ने न केवल राज्यपाल बल्कि मातृशक्ति...
नेशनल डेस्क : उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधानमंडल बजट सत्र के पहले दिन राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के अभिभाषण के दौरान हुए हंगामे को लेकर शुक्रवार को समाजवादी पार्टी (सपा) की कड़ी आलोचना की और कहा कि मुख्य विपक्षी दल ने अपने आचरण से न केवल राज्य की संवैधानिक प्रमुख बल्कि मातृशक्ति का भी अपमान था।
आदित्यनाथ ने राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा का जवाब देते समय नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडे से मुखातिब होते हुए कहा, ''अभी आप सनातन की बात कर रहे थे। महर्षि वेदव्यास सनातन धर्म के सबसे बड़े व्याख्याकार हैं। महर्षि वेदव्यास का कालखंड आज से लगभग 5000 वर्ष पहले था। उन्होंने 5000 वर्ष पहले कहा था कि मां के समान कोई छाया नहीं है, मां के समान कोई सहारा नहीं है, मां के समान कोई रक्षक नहीं है और मां के समान कोई प्रिय भी नहीं है।''

आदित्यनाथ ने कहा, ''हमारे भारत की सनातन परंपरा में मां की उम्र की या अपने से बड़ी उम्र की हर महिला को भी माता के समान सम्मान देने का विधान है। लेकिन आप लोगों ने इस सदन में माननीय राज्यपाल जी के अभिभाषण के दौरान कैसा आचरण किया? आप सनातन की बात कर रहे थे।'' उन्होंने तंज भरे लहजे में कहा, ''या तो हो सकता है कि आप उस समय इसीलिए सदन में उपस्थित नहीं हुए थे क्योंकि समाजवादी पार्टी के सदस्य आपके नियंत्रण से बाहर रहे होंगे। आपने सोचा होगा कि इस हंगामे के बीच में रहने से अच्छा है कि मैं स्वयं बाहर रहूं।

लेकिन आचरण अच्छा नहीं था। मुख्य विपक्षी दल के इस आचरण से पूरा सदन आहत महसूस कर रहा था।'' राज्य विधानमंडल के बजट सत्र के पहले दिन सोमवार को राज्यपाल के अभिभाषण के दौरान खासकर सपा के सदस्यों ने काफी हंगामा किया था। शोरगुल के बीच राज्यपाल ने उन्हें कई बार टोका भी था। मुख्यमंत्री ने मिर्जा गालिब का एक शेर पढ़ते हुए नेता प्रतिपक्ष पर तंज किया। उन्होंने कहा, "गालिब ने भी कहा था... गालिब उम्र भर यह भूल करता रहा... धूल चेहरे पर थी और आईना साफ करता रहा।" मुख्यमंत्री ने राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा में हिस्सा लेने वाले सभी सदस्यों को धन्यवाद देते हुए कहा कि सार्थक चर्चा ही लोकतंत्र और संवाद की सबसे बड़ी ताकत है।